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एक नयी सुबह का

परिवार के सदस्य की तरह पक्षियों की देखभाल करता हैं बैंककर्मी


देवरिया:- पक्षी प्रेम का ऐसा जुनून कि न सिर्फ आवास का एक हिस्से को रंग बिरंगे चहचहाते प्राणियों के नाम कर दिया बल्कि उनके खाने पीने से लेकर बीमारी वगैरह का पूरा ख्याल रखकर एक बैंक कर्मी अनूठी मिसाल पेश कर रहा है।
देवरिया के उमा नगर निवासी 34 वर्षीय संदीप दुबे इलाहाबाद बैंक की स्थानीय शाखा में कार्यरत हैं। बचपन से ही पक्षियों से अगाध स्नेह रखने वाले संदीप के पास अमरीका,आस्ट्रेलिया,दक्षिण अफ्रीका,ब्राजील और अर्जेंटीनी समेत कई देशों के दुलर्भ पक्षी है। वह बकायदा केन्द्र सरकार की एक संस्था पर पंजीयन कराकर अपने घर पर ही करीब डेढ़ सौ वर्ग फुट में देशी-विदेशी पक्षियों का आशियाना बनाकर उनकी सेवा करते हैं।
उन्होने कहा कि इनका जुनून तब पूरा हुआ जब ये बैंक में अधिकारी बने। अपने व्यस्ततम समय में इन्होंने पक्षियों को पालने का सोचा और 2013 से विदेशी पक्षियों को रखने की शुरुआत की और आज लगभग दुनिया के तमाम देशों की पक्षियों का इनके घर पर बर्डस एवेरी है। अमरीका,ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका,ब्राज़ील और अर्जेंटीना की तमाम पक्षी घर की शोभा बढ़ा रहे हैं। साउथ अफ्रीका का ग्रे पैरट तो इनके हाथों पर कंधो पर आकर बैठ जाता है और संदीप भी उसे दुलार करते है।
संदीप ने बताया कि इन पक्षियों को पालने के लिये केंद्र की एक सरकार की संस्था पर पंजीकरण कराया गया है।इन पक्षियों को खाने में चना, बादाम,मूंगफली,अखरोट,सोयबीनबीज दिया जाता है। पूरे महीने में करीब 20 किलो खाने में लगता है जिस पर 12 हज़ार रुपये खर्च होते है। संदीप की पत्नी पल्लवी सरकारी स्कूल में टीचर है। उनका कहना है कि बैंक में काम करने के बाद भी उनके पति सुबह चार बजे उठकर पहले पक्षियों के रखरखाव उनको दाना- पानी देने में जुट जाते है।
बैंक से रिटायर पिता प्रेम चंद दुबे का कहना है कि उनके बेटे संदीप अपनी कमाई का ज्यादा हिस्सा इन पक्षियों की सेवा टहल और उनके खाने तथा दवा इलाज पर खर्च कर देते हैं। उनके पक्षियों के प्रेम से मेरा मन भी गदगद रहता है।
संदीप ने यूनीवार्ता को बताया कि पक्षियों से प्रेम उनका मेरा बचपन सेे है। उन्होंने बताया कि बहुत पहले उनके घर बहुत सारी गौरैया चिड़िया आती थी लेकिन बाद में वह धीरे-धीरे आना कम हो गई। उन्होंने बताया कि गौरया के लिए घर दिया फिर धीरे-धीरे आना शुरू हो गई। उन्हे लगा कि चिड़ियों के लिए जगह कम हो गई है तो क्यों ना इनके लिए ऐसा घर बनाए जाए जहां ढेर सारी चिड़िया रह सके।
उन्होंने बताया कि आज मेरे पास शंखनूर है और उसके 16 बच्चे हैं। इसके पास पेटागोनिया कुनूर है जो अर्जेंटीना की है। ग्रे पैरट है जो साउथ अफ्रीका का है। इसके साथ ही और भी देशी विदेशी पक्षी इनके यहां आशियाना बनाये हुए हैं।संदीप ने बताया कि इनके खिलाने में दस से बारह हजार रूपये खर्च आता है। चना,गेहूं सोयबीन बीज का मिक्स करके सुबह दिया जाता हैं। ठंड में खर्चे बढ़ जाते हैं ड्राई फ्रूट दिए जाते हैं बदाम अखरोट सारे पक्षियों को देना पड़ता है। इनके लिए सवेरे चार बजे उठना पड़ता है।
बैंक कर्मी ने बताया कि जब कभी बाहर जाना होता है तो पिता और पत्नी यह सब देखभाल करते हैं इनको बीमारी में ध्यान रखना पड़ता है कि क्योकि ऐसे में चिड़ियों का मरने का डर रहता है। इसलिए सुबह शाम पड़ा देखना पड़ता है एक्टिविटी देख कर पता चल जाता है कि यह स्वस्थ हैं कि नहीं। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में इनके डॉक्टर्स नहीं हैंं। मैनपुरी और मुंबई से डॉक्टर से आनलाइन ट्रीटमेंट लेना पड़ता है।

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