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बैंक हड़ताल रहा असरदार, कई जगह निजी क्षेत्र के बैंक शाखाओं के बंद रहने का दावा


रांची:- यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर आज पूरे देश के लगभग 10 लाख से ज्यादा बैंक कर्मचारी व अधिकारी हड़ताल पर रहे । इस हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक  तथा बहुत जगह निजी क्षेत्र के बैंक भी बंद रहे हड़ताल के कारण सभी शाखाएं एवं प्रशासनिक कार्यालय बंद रहे।
इस हड़ताल पर जाने का मुख्य कारण केंद्र सरकार के द्वारा इस शीतकालीन संसद सत्र मे बैकिग अधिनियम 1970 एव 1980 तथा बैंकिग रेगुलेशन एक्ट 1949 को संशोधन करने का प्रस्ताव पटल पर  रखी है जिसमें  सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करने का प्रस्ताव है।  हमारे इस दो दिवसीय हड़ताल को केंद्रीय श्रमिक संगठनों एवं संयुक्त किसान मोर्चा ने भी अपना समर्थन किया है इसके अलावा देश के 200 से ज्यादा फेडरेशन ने भी इसका पूरा समर्थन किया है क्योंकि केंद्र सरकार की यह जनविरोधी,मजदूर विरोधी एवं राष्ट्र विरोधी कदम है।
आज सुबह से ही शाखाओं एवं प्रशासनिक  कार्यालय के समक्ष कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने प्रदर्शन किया आज के इस हड़ताल में महिला कर्मियों ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई साथ ही साथ ग्राहकों ने भी इसे अपना आंदोलन समझ साथ दिया।
   रांची स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया ,पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक ,यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कैनारा बैंक, यूको बैंक , इंडियन ओवरसीज बैंक एवं झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक रांची के प्रशासनिक कार्यालय के समक्ष जमकर प्रदर्शन एवं नारेबाजी हुई तथा इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा रांची मुख्य शाखा, पंजाब एंड सिंधबैंक रांची मुख्य शाखा, फेडरल बैंक रांची मुख्य शाखा के अलावे सभी शाखाओं के समक्ष कर्मचारी और अधिकारी बड़ी मात्रा में हिस्सा लिए।
  प्राप्त सूचना के आधार पर झारखंड राज्य के अंतर्गत सभी जिलों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ताले लटकते हुए नजर आए। सरकार के इस फैसले से आम बैंक कर्मियों तथा जनमानस में एक बहुत ही आक्रोश नजर आया सबसे बड़ी बात तो तब जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रतिवर्ष अपनी ऑपरेटिंग लाभ में बढ़ोतरी कर रहे हैं ।ऐसे परिवेश में जबकि इन्होंने अपने पिछले का 51 वर्षों में देश के सामूहिक विकास चाहे  कृषि ,स्वास्थ, शिक्षा, लघु एवं मध्यम उधोग, प्राथमिकता का क्षेत्र, बड़े उद्योग धंधे,के अलावे सरकार की सभी योजनाएं जनधन योजना ,मुद्रा लोन योजना,ज्ञब्ब्,आधार कार्ड, वृद्धि एवं विधवा पेंशन सभी योजनाओं में निजी क्षेत्र से ज्यादा बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है ।इतना ही नहीं चाहे वह नोटबंदी का दौरान हो या हाल ही में कोविड-19 के महामारी के समय सरकार की समस्त योजनाओं को घर घर तक पहुंचाया ।जबकि निजी क्षेत्र की भूमिका ना के बराबर है । सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की इस भूमिका को नजरअंदाज कर निजीकरण करने की साजिश एक खुल्लम खुली कॉर्पोरेट घरानों को अप्रत्यक्ष रूप से मदद करने के अलावा कुछ नहीं है। जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों के इस दौरान फेल होने की घटना आम रही तो दूसरी तरफ चाहे वह आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक  श्रीमती कोचर की भ्रष्टाचार की घटना ,यस बैंक के अंतर्गत उसके प्रबंध निर्देशक राना कपूर की ,एक्सिस बैंक के अंतर्गत उसके उत्तर प्रबंधन शिखा शर्मा तथा हाल ही में पीएमसी बैंक के घटनाओं से सभी वाकिफ हैं। ऐसी हालत में कॉर्पोरेट घरानों को देना सरासर अन्याय संगत है।
  इस संदर्भ में भूतपूर्व रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉक्टर रघुराम राजन तथा डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने भी केंद्र सरकार के इस कदम पर अपनी विरोध जाहिर की है। 
इस हड़ताल को झारखंड राज्य की श्रमिक संगठनों के सीटू के  कामरेड  प्रकाश विपलव , कामरेड अनिर्वाण वोस महासचिव कोआर्डिनेशन कमेटी  ऑफ एम्पलाइज एंड वर्कर्स रांची  आदि के प्रतिनिधियों ने भी  यूनियन बैंक ऑफ इंडिया आंचलिक कार्यालय अरगोड़ा बैंक आफ इंडिया जोनल ऑफिस प्रधान टावर के समक्ष  हिस्सा लेते हुए अपना समर्थन दिया तथा उपस्थित सभा  को संबोधित किया इसके अलावा किसान मोर्चा के साथियों ने भी अपना खुलकर समर्थन किया हम सभी के प्रति आभार प्रकट करते हैं।हमारा हड़ताल कल भी जारी रहेगा आप सभी से पुनः अनुरोध है कि आप अपने बैंकों में जमा राशि को बचाने के लिए उसकी सुरक्षा के लिए हमारे इस आंदोलन को अपने आंदोलन की सही समय सहयोग करें।

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