January 26, 2021

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बाबूलाल मरांडी ने आपराधिक घटनाओं में बढ़ोत्तरी पर जतायी चिंता

रांची:- बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर चिंता जतायी है।
बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि राजधानी रांची में दैनिक अखबार खबर मन्त्र के कार्यालय पर अपराधियों द्वारा दिनदहाड़े की गई फायरिंग और राज्य में अपराधियों के लगातार बढ़ते दुःस्साहस के आगे बेबस व लाचार होती पुलिसिया विधि-व्यवस्था बको बताता है। उन्होंने बताया कि विगत 7 अगस्त को राज्य के कारोबारी सह अखबार के प्रधान संपादक अभय सिंह को उनके व्हाट्सएप पर अपराधियों द्वारा 2 करोड़ रूपये रंगदारी देने का धमकी भरा संदेश मिलता है। उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। 15 तारीख को उनके कार्यालय पर फायरिंग वाली घटना हो जाती है। स्वतंत्रता दिवस जैसे हाई अलर्ट विधि-व्यवस्था के दौरान इस प्रकार की घटी वारदात से घोर आश्चर्य पैदा होना व राज्य के लॉ-एंड-ऑर्डर पर सवाल उठना लाजिमी है।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को बताया कि इसके पूर्व अपराधियों के द्वारा मेल के माध्यम से तीन बार उन्हें और मुख्यमंत्री परिजनों और सहयोगियों तक को धमकी दी जा चुकी है। इस मामले में भी उन्होंने 20 जुलाई को आपको पत्र लिखकर पुलिस द्वारा बरती जा रही लापरवाही की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया था। आपके वाले मामले में अपराधियों का धमकी भरा पहला ई-मेल 8 जुलाई को आता है और 13 जुलाई को पुलिस प्राथिमिकी दर्ज करती है। मामले में अपराधियों द्वारा प्रयुक्त सिस्टम का सर्वर स्विट्जरलैंड व जर्मनी यानि दूसरे देश के होने की बात सामने आने के बाद इंटरपोल की मदद लेने की बजाय साइबर थाना रांची से ई-मेल कर प्रयुक्त उक्त सर्वर सिस्टम का ब्यौरा मांगकर झारखंड की काबिल पुलिस पहले ही अपनी किरकिरी करा चुकी है। आज भी 40 दिन गुजरने के बाद भी इस मामले में पुलिस के हाथ खाली ही हैं। राज्य के मुखिया की सुरक्षा से जुड़े मामले में झारखंड पुलिस की यह लेतलतीफी व संवेदनहीनता देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी फेल हो चुका है। क्या पुलिस विधि-व्यवस्था से इतर किसी दूसरे काम-ध्ांधे में लीन हो चुकी है ?
बाबूलाल मरांडी ने अभय सिंह के मामले को देखा जाए तो पुलिस ने उसमें संलिप्त चार अपराधियों की गिरफ्तारी की है, इसके लिए पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया है, परंतु अपराधियों की गिरफ्तारी से पुलिस व सरकार की लापरवाही को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। सवाल यहां यह कि धमकी भरा संदेश मिलने की सूचना पीड़ित द्वारा पुलिस को दो बार दिए जाने के बाद उनके साथ किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं घटे, इसके लिए सरकार व पुलिस के स्तर से क्या व्यवस्था की गई ? यह चीजें सरकार को बतानी चाहिए। क्या पुलिस अपराधियों द्वारा ऐसी ही किसी फायरिंग वाली घटना को अंजाम देने या इससे भी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही थी ?
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि राज्य के छोटे से इलाके दुमका में प्रतिदिन केवल ट्रकों के परिवहन से लगभग 50 लाख तक की अवैध वसूली की जा रही है। इस एक मामले से पूरे राज्य की तस्वीर समझी जा सकती है। दूसरी तरफ राज्य सरकार पुलिस की उर्जा का इस्तेमाल अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से निपटने और उन्हें पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर सबक सिखाने मे ंकर रही है। स्वभाविक है, जब पुलिस अपना मूल काम छोड़कर सत्ताधारी दल के राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति को ही अपना मूल काम समझने लगेगे तब अपराधी, गुंडे, चोर-उचक्के, बदमाश उत्पात करेंगे ही/कर भी रहे हैं और आगे भी करेंगे। क्योंकि जिनको अपराध पर अंकुश लगाना है वे खुद कहीं और व्यस्त हो गए हैं या कर दिए गए हैं।

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