January 19, 2021

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गांव में निर्मित तालाब, पोखर, आहर में वर्षा जल को संरक्षित करने की अपील

चाईबासा :- पश्चिमी सिंहभूम जिला कृषि पदाधिकारी राजेंद्र किशोर के द्वारा किसान भाइयों के लिए आवश्यक सूचना जारी करते हुए कहा गया है कि अभी वर्तमान में खरीफ मौसम प्रारंभ हो चुका है, ऐसे में हम सभी का दायित्व है कि हम अपने गांव में वर्षा जल को बचाएं एवं संरक्षित करें। उन्होंने कहा कि प्रायः देखा जा रहा है कि बदलते वातावरण में पानी के अभाव के कारण किसान भाई पूरे वर्ष खेती नहीं कर पाते हैं, ऐसे में यदि सभी किसान जनसहभागिता के द्वारा वर्षा जल को गांव में ही निर्माण किए गए तालाब, पोखर, आहर आदि में इकट्ठा करें तो निश्चित रूप से सालों भर विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जा सकती है और इससे पेयजल की समस्या भी दूर हो सकती है तथा यह समय वृक्षारोपण के लिए भी उचित है एवं झारखंड सरकार के द्वारा जिले के सभी प्रखंडों में बिरसा हरित ग्राम योजना अंतर्गत वृक्षारोपण का कार्य भी संचालित किया जा रहा है।
जिला कृषि पदाधिकारी के द्वारा अपने आवश्यक सूचना में कहा गया है कि वृक्षारोपण को लेकर कम से कम 25 फीट की दूरी पर 3’3’3 फिट के आकार का गड्ढा खोदते हुए उसमें गोबर, कंपोस्ट खाद और उर्वरक डालकर पौधे को लगाएं जिससे पौधे की अच्छी वृद्धि हो सके तथा पौधे के बीच में खाली स्थान में दलहन, तिलहन, सब्जी आदि की खेती अवश्य करें, जिससे उस जमीन से त्वरित लाभ पाया जा सके। इसके साथ ही किसानी तकनीक में गुणवत्ता पूर्ण सुधार लाने के लिए ट्रेंच -सह- बंड, फील्ड बंडिग एवं नाला पुनर्जीवन आदि का कार्य भी जिले में कराया जा रहा है एवं उक्त सभी योजनाएं मिट्टी के कटाव एवं जल संरक्षण के लिए अत्यधिक उपयोगी है।
जिला कृषि पदाधिकारी के द्वारा बताया गया कि वर्तमान समय में किसानों को वैज्ञानिक खेती और समेकित कृषि प्रणाली अपनाने हेतु पीएम किसान से लाभान्वित किसानों को केसीसी प्रदान किया जा रहा है एवं जो किसान अभी तक केसीसी नहीं ले पाए हैं वे अपने प्रखंड के प्रखंड कृषि पदाधिकारी/प्रखंड तकनीकी प्रबंधक से संपर्क स्थापित कर शीघ्र अपना आवेदन पत्र बैंकों को उपलब्ध करवाएं तथा इस योजना का लाभ संपूर्ण तालाबंदी के दौरान जिले में वापस लौटे प्रवासी श्रमिक भाई भी प्राप्त कर सकते हैं। कृषि पदाधिकारी के द्वारा बताया गया कि किसान भाई खेती के अलावा गाय पालन, मछली पालन, शुकर पालन, मुर्गी पालन आदि के लिए भी बैंकों के माध्यम से केसीसी प्राप्त कर समेकित कृषि प्रणाली अपना सकते हैं।

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