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अन्नपूर्णा देवीः गृहिणी से लेकर केंद्रीय मंत्री तक सफर रहा संघर्षपूर्ण

रांची:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद में राज्यमंत्री के रूप में झारखंड से एकमात्र सांसद के रूप में शपथ लेने वाली अन्नपूर्णा देवी का राजनीतिक सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा, लेकिन अपनी ईमानदारी, लगन, निष्ठा और राजनीतिक दूरदृष्टि के कारण उन्हें लगातार एक के बाद एक कर सफलता मिलती रही। एकीकृत बिहार और झारखंड सरकार में मंत्री पद संभाल चुकी अन्नपूर्णा देवी कोडरमा लोकसभा सीट से वर्ष 2019 में पहली बार जीत कर सांसद बनी, लेकिन इससे पहले वह वर्ष 1998, 2000, 2005 और 2009 में कोडरमा विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी टिकट पर चार बार चुनाव जीत चुकी है।

बिहार-झारखंड में मंत्री रही

51वर्षीय अन्नपूर्णा देवी झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में सिंचाई और महिला एवं बाल विकास मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के साथ ही वह बिहार में भी खनन एवं भूतत्व राज्यमंत्री के रूप में जिम्मेवारी संभाल चुकी है।

पति के निधन पर घर की दहलीज से निकल कर सार्वजनिक जीवन में आना पड़ा

करीब तीस वर्ष पहले राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाली अन्नपूर्णा देवी सार्वजनिक जीवन में आने से पहले घर के दलहीज के अंदर अपने तीन बच्चों को संभालने में जुटी थी। 1993 में उनकी शादी एक राजनीतिक परिवार मे ंहुई और एकीकृत बिहार के समय आरजेडी के कद्दावर नेता तथा पूर्व मंत्री रमेश प्रसाद यादव से इनकी शादी 1993 में हुई। एक घरेलू गृहिणी के रूप में वह खुश थी और पांच वर्षां में तीन बच्चों की मां बन चुकी थी, लेकिन 1998 में पति की अचानक मौत के बाद उन्हें घर की दहलीज से बाहर निकलकर पति के राजनीतिक उत्तरदायित्वों को संभालना पड़ा। रमेश यादव के निधन के चलते 1998 में कोडरमा सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव में आरजेडी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल करने पर बिहार सरकार में खान एवं भूतत्व राज्यमंत्री बनी। बाइसके बाद लगातार वह कोडरमा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती रही। वर्ष 2013 में राज्य की हेमंत सोरेन सरकार में जल संसाधन और महिला एवं बाल विकास मंत्री का दायित्व मिला। परंतु वर्ष 2014 में पहली बार उन्हें बीजेपी की नीरा यादव से हार का मुंह देखना पड़ा। लेकिन इन्होंने धैयै नहीं छोड़ा और लगातार अपने क्षेत्र में काम करती रही। इस बीच उन्हें प्रदेश आरजेडी का अध्यक्ष भी बनाया गया। अन्नपूर्णा देवी का लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेस्जवी यादव और तेजप्रताप यादव तथा मीसा भारती समेत परिवार के सभी सदस्यों से काफी मधुर संबंध था, इस कारण करीब ढ़ाई दशक तक झारखंड आरजेडी के सभी महत्वपूर्ण फैसले में उनकी सहमति होती थी।

वर्ष 2019 में आरजेडी छोड़ कर बीजेपी में शामिल हुई

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले अन्नपूर्णा देवी ने अचानक आरजेडी छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम कर सभी को चौंका दिया। बीजेपी ने उन्हें कोडरमा से उम्मीदवार बनाया और रिकॉर्ड मतों से जीत कर पहली बार लोकसभा पहुंची। इसी कारण बीजेपी ने उन्हें संगठन में एक बड़ी जिम्मेवारी सौंपते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया और नेतृत्व ने हरियाणा बीजेपी के सह प्रभारी का भी दायित्व दिया।

बिहार-झारखंड के यादव बोट बैंक को साधने की कोशिश

अन्नपूर्णा देवी को भाजपा में शामिल कराने के पीछे बीजेपी का मकसद झारखंड-बिहार में यादव मतदाताओं को पार्टी से जोड़ना था। झारखंड में एक हद तक बीजेपी इसमें सफल भी रही और बिहार में भी पार्टी ने इनकी योग्यता का बखूबी इस्तेमाल किया और अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिलने से पार्टी नेताओं में खुशी का माहौल है।

किसान की बेटी ने इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की

अन्नपूर्णा देवी दुमका जिले के एक छोटे से गांव अजमेरी में एक कृषक परिवार में जन्म लिया और उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्रामीण परिवेश में हुई। शिक्षा के प्रति इनका लगाव शुरू से ही था।यही वजह था कि वह माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपने गांव से 5 किमी दूर स्कूल जाती थी। दुमका से ही मैट्रिक करने के बाद आगे की पढ़ाई पटना से की और रांची विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।

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