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झारखंड का एलोवेरा विलेजः महिलाओं की बदल दी जिंदगी


कम लागत में महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर, रोजगार के लिए पलायन पर भी लगा अंकुश
रांची:- झारखंड की राजधानी रांची से करीब 25 किलोमीटर नगड़ी प्रखंड का देवरी गांव इन दिनों एलोवेरा की खेती के लिए देशभर में चर्चित हो रहा है। इस गांव की पहचान अब पूरे झारखंड में एलोवेरा विलेज के रूप में होने लगी है और एलोवेरा की खेती ने महिलाओं की जिंदगी को बदल दिया। एलोवेरा की खेती में कम लागत के कारण महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही है, वहीं गांव में ही रोजगार मिल जाने के लिए पलायन पर भी अंकुश लग पाया है।
आईसीएआर ने सर्वेक्षण में देवरी को एलोवेरा की खेती के लिए योग्य माना
दिसंबर 2018 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, आईसीएआर और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने आदिवासी उप योजना के तहत देवरी गांव में सर्वेक्षण कराया गया और इसे एलोवेरा की खेती के लिए योग्य माना गया। जिसके बाद इस गांव का नाम ही एलोवेरा विलेज दे दिया गया। एलोवेरा की खेती में गांव की अधिकांश महिलाओं ने दिलचस्पी दिखायी और कुछ ही वर्षां में इस गांव की चर्चा पूरे झारखंड ही नहीं, देश स्तर पर होने लगी है।
एलोवेरा के पत्ते बेच कर महिलाओं को प्रति महीने 5 से 6 हजार रुपये की हो रही है आमदनी
देवरी गांव की भाग्यमनी तिर्की का कहना है कि दिसंबर 2018 में गांव की तीन दर्जन से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण के लिए रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ले जाया गया, जहां उन्हें प्रशिक्षण देने के साथ ही सभी महिलाओं को 50-50 एलोवेरा का पौधा दिया गया और इस छोटी से शुरुआत के साथ आज देवरी गांव का नाम पूरे झारखंड में विख्यात हो गया है। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिलने पर दूर-दूर से लोग एलोवेरा के पौधे और पत्ते को खरीदने आते है। गांव की महिलाएं 35 रुपये किलो के हिसाब से एलोवेरा के पत्ते बेचती है और प्रति महीने इससे पांच-छह हजार रुपये आसानी से कमा लेती है।
प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना से मुनाफा में कई गुणा होगी वृद्धि
देवरी पंचायत की मुखिया मंजू कच्छप खुद भी एलोवेरा की खेती कार्य में लगी है। वह बताती है कि गर्मी के दिनों में कुछ दिनों के अंतराल में सिंचाई की जरुरत पड़ती है, जबकि अन्य मौसम में सिंचाई की कोई खास जरुरत नहीं पड़ती है। साथ ही पौधरोपण में भी किसी प्रकार का खर्च नहीं होता है। बड़े पौधे से दूसरा पौधा तैयार होता है, जिसके कारण इसमें किसी प्रकार का निवेश नहीं होता है। साथ ही बाजार भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। हालांकि मंजू हेम्ब्रम का कहना है कि यदि गांव में ही एलोवरा प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना हो जाए, तो मुनाफा कई गुणा बढ़ जाएगा।
कई बीमारियों और सौंदर्य प्रसाधन में एलोवेरा का होता है उपयोग
एलोवेरा का उपयोग जॉन्डिस समेत कई अन्य बीमारियों के उपचार में होता है। इसके अलावा सौंदर्य प्रसाधन, फेसवॉश, साबुन बनाने समेत अन्य कार्यां में भी इसका उपयोग होता है। बड़े शहरों में लोग अब एलोवेरा को पेय पदार्थ के रूप में भी कर रहे है। इस खुबियों की वजह से रांची और आसपास से बड़ी संख्या में लोग एलोवेरा के पत्ते को खरीदने के लिए पहुंचती है। रांची के हटिया स्थित लटमा गांव से एलोवरा का पत्ता खरीदने पहुंची करमी देवी ने बताया कि वह इसके पत्ते का उपयोग कई कार्यां में करती है।

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