April 18, 2021

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अधिकारियों के हाथ सभी चीजों को नहीं छोड़ा गया, पक्ष-विपक्ष के सदस्य लिखित में सुझाव दें-मुख्यमंत्री

कृषि विभाग की 31.89अरब की अनुदान मांग ध्वनिमत से पारित

रांची:- झारखंड विधानसभा ने कृषि विभाग से संबंधित इक्कतीस अरब नवासी करोड़ करोड़ रूपये के अनुदान मांग को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी। इससे पहले बजट सत्र के सातवें दिन की कार्यवाही भी आज विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के कारण बाधित रही और सभा की कार्यवाही को एक बार स्थगित करना पड़ा, लेकिन कार्यवाही दुबारा शुरू होने पर कई तारांकित और ध्यानाकर्षण सूचना पर सरकार की ओर से वक्तव्य रखा गया, वहीं शून्यकाल के दौरान पक्ष-विपक्ष के कई सदस्यों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र और राज्य की ज्वलंत समस्याओं को सदन में रखा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भोजनावकाश के बाद विधानसभा में कृषि विभाग की अनुदान पर हुई चर्चा के बाद हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है। उन्हांेने कहा कि अधिकारियों के हाथों सभी चीजों को नहीं छोड़ दिया गया है। मुख्यमंत्री ने विधायकों से भी आग्रह किया कि वे अपना सुझाव लिखित रूप से सरकार को दें। वहीं सरकार की ओर से अनुदान मांग पर जवाब देते हुए कृषिमंत्री बादल ने राज्य में वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा की शुरूआत की गयी और इन चार वर्षों में 493 करोड़ रूपये केंद्र सरकार द्वारा नामित कंपनियों का भुगतान कर दिया गया,लेकिन इसके एवज में राज्य के किसानों को सिर्फ 79 करो़ड़ 93 लाख रूपये का लाभ मिला। इसलिए सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार में गौशाल के लिए जितनी राशि दी गयी थी, उससे अधिक राशि इस बार गौशाला को दिया जा रहा है। इसके अलावा राज्य सरकार दूध खरीद के लिए प्रति लीटर एक रूपये का अनुदान भी दुग्ध उत्पादक कंपनियों को दी जाएगी। वहीं सिंचाई सुविधाएं भी विकसित की जा रही है । कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को 50 हजार तक ़ की कर्जमाफी के लिए काम किया जा रहा है, अगले वित्तीय वर्ष में भी किसानों की कृषि ऋण की माफी के लिए बजट में आवश्यक राशि का प्रवधान किया गया है। अनुदान मांग पर चर्चा में विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी, रणधर सिंह, राजेश कच्छप, बंधु तिर्की,लंबोदर महतो, विनोद कुमार सिंह, दशरथ गगराई और अमित यादव ने भी हिस्सा लिया।
इस बीच भाजपा के राज सिन्हा ने राज्य के सभी मेडिकल काॅलेजों और अस्पतालों के रेजिडेंट डाॅक्टरों के हड़ताल पर चले जाने का मामला उठाया। विधानसभा अध्यक्ष ने इस मसले पर सरकार को संज्ञान लेने को कहा। वहीं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भोजनावकाश के बाद पीठासीन पदाधिकारी के रूप में विधायक सीता सोरेन ने सभा की कार्यवाही का संचालन किया।
इससे पहले आज प्रथम पाली में विधायक बंधु तिर्की के एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हस्तक्षेप करत ेहुए कहा कि विस्थापितों की समस्या को लेकर पिछले बीस वर्षाें में चिंता कोई चिंता नहीं की गयी,लेकिन गठबंधन सरकार ने पहली बार अधिगृहित जमीन को भू रैयतों को वापस करने का काम किया है। यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं होग, बल्कि यह अनवरत जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि एचईसी ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी उद्योग और जलाशय समेत अन्य केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए जमीन अधिग्रहण किया गया, सरकार विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर उपाय करना चाहती है। समस्या का समाधान आयोग के माध्यम से होगा या कोई अन्य माध्यम से होगा, इस पर सरकार विचार कर जल्द ही निर्णय लेगी।
पेयजल स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने भाजपा के मनीष जायसवाल के एक प्रश्न के उत्तर में बताया गया कि राज्य सरकार वर्ष 2024 तक हर घर को शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ तेजी से काम कर रही है। उन्हांेने बताया कि पिछले दस वर्षों में सिर्फ चार लाख 40 हजार घरों में ही शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध करायी गयी,जबकि उनकी सरकार में पिछले छह सात महीनों में ही 2 लाख 40 हजार घरों में पाइप लाइन से जलापूर्ति के लिए कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। भाकपा-माले विनोद कुमार सिंह के एक प्रश्न के उत्तर में प्रभारी मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि पत्थलगड़ी से संबंधित दर्ज मुकदमों की वापसी की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है और इसे जल्द ही पूरा किया जाएगा।

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