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कृषि क्षेत्र को हरसंभव सहयोग की जरूरत : वेंकैया


मोतिहारी:- उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कृषि क्षेत्र को हरसंभव सहायता प्रदान करने का आह्वान करते हुए आज कहा कि यह न केवल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है बल्कि हमारी संस्कृति भी है। श्री नायडू ने रविवार को पूर्वी चंपारण जिले के पिपराकोठी में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू) के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “कृषि देश की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ है। कृषि न केवल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बल्कि यह हमारी संस्कृति भी है। यह जानकर खुशी हुई कि आरपीसीएयू अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित कर रहा है। यह कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।”
उपराष्ट्रपति ने छात्रों और अन्य कृषि विशेषज्ञों से बिहार और देश के अन्य हिस्सों में अधिक से अधिक पंचायतों तक पहुंचने का आह्वान किया और कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीकों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण होने वाले छात्रों के स्टार्टअप को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
श्री नायडू ने कहा कि ऐसे नए क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जहां लोगों को कृषि में नवीनतम विकास के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी मिलने के साथ ही वनस्पतियों, जीवों, प्राकृतिक सुंदरता की भी झलक मिल सके। सतत विकास के लिए सामाजिक और पारिस्थितिक घटकों को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र की विशाल क्षमता का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान रिवर्स माइग्रेशन की प्रवृत्ति देखी गई, ऐसे में कृषि क्षेत्र लोगों को रोजगार प्रदान करने में सहायक हो सकता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नालंदा और विक्रमशिला प्राचीन काल में शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र थे। बिहार को एक बार फिर से विश्व का ज्ञान केंद्र बनाने के लिए सभी प्रयास किए जाने चाहिए। युवा पीढ़ी को अपने चुने हुए क्षेत्र में जोश के साथ काम करना चाहिए।
श्री नायडू ने छात्रों से देश की महान हस्तियों के जीवन और योगदान के बारे में पढ़ने का आह्वान किया और कहा कि युवा पीढ़ी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस और सरदार बल्लभ भाई पटेल जैसे महान विभूतियों की शिक्षाओं और उपदेशों को ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार में डॉ राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर और कैलाशपति मिश्रा सहित कई महान हस्तियों का जन्म हुआ। युवा पीढ़ी को विधानमंडल, संसद और स्थानीय निकायों के कार्यों को समझने के अलावा उनके योगदान के बारे में पता होना चाहिए।
इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य जनसंख्या के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है लेकिन क्षेत्रफल के मामले में यह 12वें स्थान पर है। उच्च जनसंख्या घनत्व के कारण, जो शायद दुनिया में सबसे अधिक हो सकता है राज्य में कृषि भूखंडों (रकबा) का आकार कम हो गया लेकिन सरकार के निरंतर प्रयासों के बाद कृषि उत्पादों के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में बिहार का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। बिहार को अब तक पांच कृषि कर्मण पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
श्री कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य के कृषि क्षेत्र की विशाल क्षमता का उपयोग करने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उनकी सरकार ने वर्ष 2008, 2012 और 2017 में कृषि रोड मैप लॉन्च किया था, जिसे सफलतापूर्वक क्रियान्वित भी किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूर्वी चंपारण जिले के पिपराकोठी में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध कराई है। यह विश्वविद्यालय अच्छा प्रदर्शन कर रही है। इसी तरह औरंगाबाद, सारण और मधुबनी में नए कृषि महाविद्यालय खोलने के लिए भूमि भी प्रदान की गई है तथा जरूरत पड़ने पर और संस्थान खोलने के लिए भी जमीन मुहैया कराई जाएगी।
इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल फागू चौहान, पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, उप मुख्यमंत्री रेणु देवी और बिहार के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।

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