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डॉक्टर बनने के बाद युवती में पर्वतारोहण के प्रति जागी दिलचस्पी, यूरोप के सर्वाच्च शिखर पर फहराया तिरंगा


एमबीबीएस डॉक्टर के रूप में क्रिटिकल केयर यूनिट में सेवा देकर कोरोना काल में कई जिंदगियां बचायी
रांची:- झारखंड की बेटियां खेल ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी देश ही नहीं बल्कि दुनिया में अपना नाम रौशन कर रही हैं। हाल ही में रांची की एक पर्वतारोही युवती ने यूरोप के सबसे ऊंचे शिखर पर तिरंगा लहरा कर देश का मान बढ़ाया है।
हौसले बुलंद हो तो पर्वत की ऊंचाइयों को छूना भी आसान हो जाता है। यह सिद्ध कर दिखाया है मूल रूप से रांची की रहने वाली डॉक्टर शिप्ती श्रद्धा सिंह ने। एमबीबीएस डिग्री हासिल करने के बाद करीब 15वर्षां से चिकित्सक के रूप में काम कर रही शिप्ती ने पर्वतारोहियों के एक दल के साथ 17 अगस्त की सुबह में यूरोप के सर्वोच्च शिखर माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा लहरा कर देश का नाम ऊंचा किया है। हालांकि शिप्ती और उनके साथी पर्वतारोही दल ने 15 अगस्त की सुबह भारत के स्वतंत्रता दिवस पर माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन खराब मौसम और बर्फबारी के कारण दो दिन का विलंब हो गया।
शिप्ती श्रद्धा सिंह के बारे में जानकर हैरानी तब और अधिक होती है जब पता चलता है कि वह पर्वतारोही होने के साथ ही दिल्ली के एक निजी अस्पताल में लगातार मरीजों की सेवा में जुटी रहती है ।बेंगलुरु और कोलकत्ता से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री हासिल करने के बाद फिलहाल वहदिल्ली के एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं। क्रिटिकल केयर यूनिट में सेवा देकर कोरोना काल में इन्होंने कई जिंदगियों को बचाने का भी काम किया है।
खास बात यह है कि शिप्ती की दो अन्य बहनें भी पेशे से डॉक्टर हैं। बेटियों को उपलब्धियों के शिखर तक पहुंचाने में इनके माता-पिता का भरपूर सहयोग रहा है। शिप्ती की मां इला रानी सिंह बताती है कि जीवन के हर डगर पर वह बेटियों के साथ खड़ी रहती हैं।
शिप्ती श्रद्धा सिंह ने यह साबित कर दिया है कि लड़कियां किसी से कम नहीं है। दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो वे एक साथ कई विधाओं में अपना नाम रौशन कर सकती हैं।

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