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भारत की राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक चेतना के सूत्रधार थे आदि शंकराचार्य : धामी


देहरादून:- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने शुक्रवार को कहा कि आदि गुरु श्री शंकराचार्य जी भारत की राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक चेतना के सूत्रधार थे तथा कलयुग में वह भगवान शंकर के साक्षात अवतार स्वरूप हैं।
श्री धामी ने कहा कि आदि गुरु श्री शंकराचार्य ने हिन्दू धर्म संस्कृति के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ जगन्नाथपुरी, द्वारिकापुरी, रामेश्वरम एवं बदरीनाथ के रूप में चार मठों की स्थापना कर भारतवर्ष को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। वर्ष 2013 की आपदा में आदि गुरु शंकराचार्य जी की समाधि पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। आज उनकी समाधि का पुनर्निर्माण और उनकी दिव्य प्रतिमा की स्थापना सम्पूर्ण देश की ओर से आदि गुरू शंकराचार्य जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एवं भारतीय संस्कृति का मान, सम्मान एवं स्वाभिमान सम्पूर्ण विश्व में बढ़ रहा है। आज भारत विश्व गुरू के पद पर पुनः आरूढ़ होने के लिए तैयार हो रहा है। श्री केदार धाम के पुनर्निर्माण एवं आदिगुरू शंकराचार्य जी की समाधि की पुर्नस्थापना के लिए आदिगुरू जैसी ही जीजीविषा, संकल्प और धैर्य की आवश्यकता थी, जो श्री मोदी के नेतृत्व में परिलक्षित होती है। श्री धामी ने कहा कि यह पुनर्निर्माण कार्य सिर्फ ईंट, बालू, पत्थर एवं इस्पात की सरंचनाएं नही है बल्कि एक स्वप्नदृष्टा एवं दूरदर्शी नेता के विजन का साकार प्रतिरूप है।”
उन्होंने कहा, “ शिक्षा, जन-स्वास्थ्य, बिजली, पानी, संपर्क ,रोजगार, महिला एवं बाल विकास, खेती-किसानी, सिंचाई हर क्षेत्र में उत्तराखण्ड ने पिछले पांच वर्षों में अभूतपूर्व तरक्की की है। प्रधानमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप 2025 में उत्तराखण्ड स्थापना के रजत जयंती वर्ष में हम अपने प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए संकल्पबद्ध हैं।”
उन्होंने कहा, “ माननीय प्रधानमंत्री जी , हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि आपके द्वारा दिये गए मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ को अपनाकर आपके सपनों का नया भारत बनाने में हम अपना पूर्ण योगदान देते रहेंगे।”

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