January 28, 2021

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बौद्ध स्मृति स्तूप और संग्रहालय निर्माण में लाएं तेजी :मुख्यमंत्री नीतीश

हाजीपुर:- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वैशाली में बुद्ध स्मृति स्तूप एवं बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय के निर्माण कार्य में तेजी लाने का आज अधिकारियों को निर्देश दिया।

श्री कुमार ने मंगलवार को वैशाली में निर्माणाधीन बुद्ध स्मृति स्तूप एवं बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय का निरीक्षण किया। कार्यस्थल पर उनके समक्ष बुद्ध स्मृति स्तूप एवं बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय के मास्टर प्लान की प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री ने बुद्ध स्मृति स्तूप, अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय, निर्माणाधीन पार्क, विजिटर गैलरी एवं अन्य निर्माण कार्यो का स्थल निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को कई निर्देश दिये। श्री कुमार ने निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हमलोगों की इच्छा है यहां चल रहे निर्माण कार्य तेजी से पूर्ण हों ताकि अधिक से अधिक संख्या में यहां पर्यटक आ सकें।” उन्होंने कहा कि वैशाली के विकास के संबंध में स्व. रघुवंश बाबू से भी चर्चा होती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुद्ध सम्यक संग्रहालय का शिलान्यास वह पहले ही कर चुके हैं।वैशाली में उत्खनन से प्राप्त भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष पटना म्यूजियम में रखा हुआ है। दुनिया भर में जितने बौद्ध धर्मावलंबी हैं या भगवान बुद्ध को समझने वालों के लिए वैशाली ही एक ऐसी जगह है, जहां से भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष मिले हैं और वह उनके लिये प्रामाणिक भी मानी जाती है। बुद्ध स्मृति स्तूप पत्थर के बनाये जा रहे हैं ताकि लंबे समय तक कायम रह सके। लोग वैशाली के इतिहास को जानने के साथ ही उत्खनन से प्राप्त चीजों को बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय में देख सकेंगे।
श्री कुमार ने कहा कि बड़ी संख्या में विदेशों से पर्यटक बोधगया और राजगीर आते हैं। वैशाली को इससे जोड़ा जा रहा है, जिससे यहां भी बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आयेंगे। वैशाली को बौद्ध सर्किट से जोड़ने के लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार का भी सहयोग मिल रहा है। यहां जब बुद्ध स्मृति स्तूप बन कर तैयार हो जाएगा तो पर्यटक सिर्फ बोधगया आकर ही नहीं लौटेंगे बल्कि वैशाली भी आयेंगे। बोधगया में भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुयी थी तो वैशाली का भी बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए विशेष महत्व है। इसी दृष्टिकोण से उनकी सरकार ने बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय और स्मृति स्तूप का निर्माण करवाना चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के कारण यहां निर्माण कार्य अवरुद्ध था, जो फिर से शुरू हो गया है, इसी का जायजा लेने वह आए हैं। वैशाली में निर्माण कार्य तेजी से हो यह जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि अगले वर्ष के अंत तक सारे काम जरूर पूरे कर लिये जायेंगे।
श्री कुमार ने कहा कि कोविड वैक्सीन आने के बाद बड़ी संख्या में पर्यटक एक बार फिर से पर्यटन स्थलों पर पहले की तरह आने लगेंगे। वैशाली का अपना ऐतिहासिक महत्व है। इस स्थल का भगवान बुद्ध के साथ-साथ भगवान महावीर से भी रिश्ता है। उन्होंने कहा कि वैशाली का पुराना इतिहास है। यहां के तालाब का भी ऐतिहासिक महत्व है। इसका भी पुनर्स्थापन कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जब वह यहां आये थे तो सब लोगों ने कहा कि तालाब में पानी नहीं रहता है। इसको लेकर जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया गया है कि ऐसी व्यवस्था करें कि तालाब में हमेशा पानी मौजूद रहे। तालाब को एक से दो मीटर और गहरा किया जायेगा ताकि यहां सालों भर पानी रहे। इस तालाब का ऐसा ऐतिहासिक महत्व था कि लोग इसमें स्नान करने के बाद ही कार्यक्रम में बैठते थे। उसी को ध्यान में रखकर इसका पुनर्स्थापन कराया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान कला संस्कृति एवं युवा मामलाें के मंत्री मंगल पांडेय, विधायक सिद्धार्थ पटेल, मुख्य सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, वैशाली की जिलाधिकारी उदिता सिंह सहित अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद थे।

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