January 23, 2021

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कोविड के वर्तमान परिवेश में जरूरी है कैंसर जागरूकता अभियान की श्रृंखला: डॉ. रतन

चिकित्सा विज्ञान के कमजोर होने पर संबल देता है अध्यात्म और जिंदगी जीने की लालसा

बेगूसराय:- पूरी दुनिया कोरोना के संक्रमण से बचाव और मुकम्मल इलाज की दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़े, इसके लिए रोज विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञ नया-नया नुस्खा बता रहे हैं। लेकिन इस बात के भी ठोस प्रमाण हैं कि कोरोना संक्रमण ने उन्हीं लोगों को ज्यादा परेशान किया जो कैंसर, डायबिटीज, गंभीर किडनी रोगों, हृदय रोगों सहित अन्य जानलेवा बीमारियों की गिरफ्त में पहले से थे। जिनकी रोग प्रतिरोधन क्षमता पहले से ही काफी कम थी या इलाज की कड़ी में इम्यून सिस्टम्स को दवाओं के माध्यम से कमजोर कर दिया गया था। कोरोना वायरस का संक्रमण तम्बाकू उत्पादों का सेवन करने वालों में अधिक जानलेवा बन जाता है। कैंसर अवेयरनेस सोसायटी के चैप्टर सचिव डॉ. रतन प्रसाद ने बताया कि इसकी जड़ में जानलेवा कैंसर कारक तम्बाकू सेवन, निष्क्रिय जीवन शैली, जंक फूड का सेवन, अस्वास्थ्यकर भोजन, नकारात्मक सोच के साथ मादक पदार्थों का सेवन और जिंदगी में तनाव ही मूल जिम्मेवार है जिसने लोगों में रोगों से लड़ने की शारीरिक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम्स को नेस्तनाबूद कर दिया है। प्राकृतिक वनस्पति, पौष्टिक विटामिन, एन्टी ऑक्सिडेंट फलों का सेवन, अदरख, हल्दी, नींबू, शहद, शाकाहारी भोजन, हर कदम पर शारीरिक स्वच्छता एक मजबूत कड़ी के रूप में सामने आया, जिसने इस वायरस के संक्रमण से बचाव का एक रास्ता दिखाया है। अध्यात्मिक लगाव, योगासन, सकारात्मक सोच, सक्रिय जीवन शैली, जिंदगी जीने का जज्बा जैसे तत्त्वों को आत्मसात कर अपने शरीर के इम्यून सिस्टम को बढ़ाते हुए कैंसर तथा अन्य वायरस जनित बीमारियों का मुकाबला मजबूती के साथ किया जा सकता है। डॉ. रतन प्रसाद ने बताया कि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि जिस छोर पर चिकित्सा विज्ञान कुछ कमजोर होने लगता है, उसे उसी जगह संबल प्रदान करने के लिए अध्यात्म, अदृश्य जन कल्याणकारी शक्तियां, जिंदगी जीने की लालसा जैसी उम्मीद की किरणें आ खड़ी होती हैं। प्रकृति की ताकत और समूचे ब्रमांड को नियंत्रित करने वाले उस अदृश्य शक्ति का नमन करना होगा, जिनका संदेश प्रेरणा देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी माना है कि 33 प्रतिशत कैंसर का इलाज है, 33 प्रतिशत कैंसर का जागरूकता के माध्यम से बचाव है और 33 प्रतिशत कैंसर का केवल पैलिएटिव उपचार है। लेकिन कैंसर अवेयरनेस सोसाइटी का मानना है कि हिंदुस्तान में लगभग 50 प्रतिशत तक कैंसर रोगों को जन जागृति के माध्यम से रोका जा सकता है। यदि खैनी, गुटका, धूम्रपान (बीड़ी, सिगरेट), हुक्का, गुल, जर्दा जैसे तम्बाकू मिश्रित उत्पादों का सेवन रोक दिया जाय तो करीब 40 प्रतिशत तक विभिन्न प्रकार के कैंसर रोगों को पनपने से रोका जा सकता। सरकार ने कोटपा अधिनियम- 2003 को लागू कराने के प्रयास किये हैं। लेकिन तम्बाकू नियंत्रण को धरातल पर कार्यान्वित करने के लिए दृढ़ पहल की आवश्यकता है। खासकर युवा वर्गों, स्कूली विद्यार्थियों के बीच तम्बाकू उत्पादों का सेवन नहीं करने के लिए विशेष संकल्प के साथ काम करना होगा। तम्बाकू उत्पादों के सेवन को नियंत्रित और उन्मूलन करने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ ही सभी लोगों का भी नैतिक दायित्व है कि अपने स्तर से सकारात्मक पहल करें। उन्होंने कहा कि मुंह, गला और फेफड़ा कैंसर के साथ ही महिलाओं में स्तन (ब्रैस्ट) कैंसर, सर्वाइकल (बच्चादानी के मुख) कैंसर रोगों को शुरुआती अवस्था में ही पहचान और समुचित इलाज के लिए टार्गेटेड स्क्रीनिंग सह उपचार कैम्प के साथ ही निःशुल्क सेवा प्रदाताओं और सरकारी अस्पतालों की सम्मिलित भागीदारी को भी एक प्लेटफॉर्म पर लाना होगा ताकि वंचित और गरीब आबादी को जिंदगी जीने का एक सहारा मिल सके।

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