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पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए 400 अरब डॉलर एफडीआई की जरूरत


नयी दिल्ली:- भारत को वित्त वर्ष 2027 में पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए अगले छह वर्षों में न:न सिर्फ आठ लाख करोड़ डॉलर के सकल पूंजी निर्माण की आवश्यकता पड़ेगी बल्कि इस दौरान कम से कम 400 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की भी जरूरत हाेगी। बाजार अध्ययन और सलाह सेवा देने वाली एजेंसी डेलाॅयट ने आज जारी अपनी एक रिपोर्ट में यह उल्लेख करते हुये कहा कि पिछले रुझानों के आधार पर भारत को आठ लाख करोड़ डॉलर के सकल पूंजी निर्माण में से 250 अरब डॉलर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की आवश्यकता होगी। इस तरह भारत को आगामी 6-8 वर्षों में कम से कम 400 अरब डॉलर के एफडीआई की आवश्यकता पड़ेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी के बावजूद भारत में एफडीआई के प्रवाह का जारी रहना वित्त वर्ष 2027 में भारत की पांच लाख करोड़ डॉलर की वित्तीय योजना के लिए एक आशा की किरण बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2020-2021 में एफडीआई 81.72 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक था। डेलॉयट ने कहा है कि पूंजी-प्रधान क्षेत्रों में एफडीआई का निवेश राष्ट्र के सकल पूंजी निर्माण तथा भारत को वैश्विक व्यापार में एक साझीदार के रूप में स्थापित करने की कुंजी है। भारत में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम निवेशकों के दृष्टिकोण को समझें और इसके लिए डेलॉइट ने अमेरिका, जापान, यूनाइटेड किंगडम तथा सिंगापुर जैसे चार देशों के 1200 बहुराष्ट्रीय व्यावसायिक लीडरों का सर्वेक्षण किया।
सर्वेक्षण के आधार पर उसने कहा कि भारत निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। इस सर्वे में शामिल 44 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भारत में अतिरिक्त या पहली बार निवेश करने की उनकी योजना हैं। पहली बार निवेश करने वालों में से लगभग दो-तिहाई अगले दो वर्षों के भीतर भारत में निवेश की योजना बना रहे हैं। इसमें कहा गया है कि भारत का घरेलू बाजार देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि में प्रचूर अवसर उपलब्ध कराता है। सर्वेक्षण से यह पता चला है कि वैश्विक व्यावसायिक लीडरों ने भी भारत की इस क्षमता को स्वीकारा है और वे भारत में न केवल एक निर्यात केंद्र के रूप में बल्कि एक सशक्त घरेलू बाजार से लाभार्जन के लिए भी निवेश करना चाहते हैं जबकि निर्यात एक महत्वपूर्ण घटक बना हुआ है। भारत में जापान का अधिकांश निवेश भारत के घरेलू बाजार में उसकी दिलचस्पी से प्रेरित है। इसमें कहा गया है कि सर्वे में शामिल अधिकांश व्यावसायिक लीडर भारत को स्थायित्व की तुलना में आर्थिक विकास तथा कुशल श्रमशक्ति के संदर्भ में ऊंचे पायदान पर रखते हैं। वे भारत को राजनीतिक तथा आर्थिक रूप से मजबूत पाते हैं। हालांकि, वे हमारे संस्थागत पक्षों जैसे कराधान, विनियामक स्पष्टता एवं कार्यकुशल न्याय प्रणाली जैसे क्षेत्रों में सुधार की अपेक्षा भी करते हैं। अपर्याप्त बुनियादी ढांचा भी एक महत्त्वपूर्ण नकाराकत्मक तथ्य है। कर प्रावधानों तथा तत्संबंधी कानून में पूर्व प्रभाव से संशोधन करने संबंधी भारत सरकार का निर्णय एक सकारात्मक कदम है, जो निवेशकों की कुछ प्रमुख चिंताओं का निवारण करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापार को सुगमतापूर्वक करने संबंधी सरकार के सुधार प्रावधानों के विषय में जानकारी का अभाव भारत में निवेश करने में निवेशकों की रुचि एवं भारत के निवेश तथा व्यावसायिक प्रोत्साहनों के प्रति उनकी जागरूकता में एक स्पष्ट संबंध देखा जा सकता है। सरकार के कार्यक्रमों, प्रोत्साहनों तथा सुधार की जानकारी मिलने के बाद 75 प्रतिशत व्यावसायिक लीडर भारत में निवेश करने के लिए उत्सुक दिखे। चीन और वियतनाम की तुलना में वे इस समय भारत में व्यवसाय करने के लिए एक चुनौतीपूर्ण वातावरण देखते हैं, जिसका कारण है भारत के विभिन्न आर्थिक कार्यक्रमों के प्रति उनकी जानकारी में कमी।

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