January 17, 2021

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कोयंबटूर से रेस्क्यू कराकर विमान से 24 बेटियां वापस लायी गई

राज्य सरकार ने सभी बच्चियों के पुनर्वास का दिलाया भरोसा

रांची:- झारखंड की 24 बेटियां तमिलनाडु के कोयंबटूर से रेस्कयू कराकर विमान से रांची लाई गयीं। लॉकडाउन खुलने के बाद ये पीड़ित लड़कियां दलालों के चंगुल में फंस गइंर् थीं। दलालों ने इन्हें अच्छी नौकरी और सैलरी का प्रलोभन देकर अपने जाल में फंसा लिया था। दलालों ने लड़कियों को 12 हजार सैलरी देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन पीड़ित लड़कियों को दवा कंपनी में मात्र चार से पांच हजार रुपये दिये जाते थे। इतना ही नहीं इन लड़कियों से सोलह-सोलह घंटे काम कराए जाते थे। पीड़ित लड़कियों ने अपनी आपबीती परिवार को बताई और परिवार ने जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक बात पहुंचाई। बाद में मुख्यमंत्री के निर्देश पर श्रम विभाग तथा फिया फाउंडेशन ,एसीसी सीमेंट और आसरा संस्था के सहयोग से लड़कियों को एयरलिफ्ट कराया गया। चेन्नई से एयर लिफ्ट कर बुधवार सुबह इन्हें रांची लाया गया।
कोयंबटूर से रांची वापस लायी गयी सभी लड़कियां पश्चिमी सिंहभूम जिले की रहने वाली थी। विमान से रांची पहुंचने पर सभी लड़कियों को बस से पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा ले जाया गया, जहां जिले के उपायुक्त अरवा राजकमल और अजय लिंडा की मौजूदगी में सभी बच्चियों से मुलाकात उनसभी के पुनर्वास और आवश्यक प्रशिक्षण का भरोसा दिलाया।
पुलिस अधीक्षक अजय लिंडा ने रेक्स्यू कर वापस लायी गयी सभी बच्चियों से वार्ता कर उनसे उनकी समस्याओं के अलावा उन्हें कैसे और किनके द्वारा उक्त कंपनी में ले जाया गया आदि विषयों पर विस्तृत रूप से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बातचीत के क्रम में ज्ञात हुआ है कि गैर कानूनी तरीके से तथा वर्तमान आयु से अधिक की आयु को दर्शा कर निबंधन करवाया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मानव तस्करी से जुड़े हुए व्यक्तियों पर कानूनी कार्यवाही करने के लिए भी मामले में संज्ञान लिया गया है।

उपायुक्त के द्वारा बताया गया कि बातचीत के क्रम में यह भी ज्ञात हुआ कि इन सभी को प्रशिक्षण एवं 12,000 वेतन देने की बात बताई गई थी, उसे भी कंपनी के द्वारा पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि वापस लौटी सभी बच्चियों के पुनर्वास के लिए भी योजना तैयार किया जा रहा है, इसके तहत जिले के झींकपानी में अवस्थित एसीसी सीमेंट द्वारा संचालित सिलाई मशीन प्रशिक्षण संस्था में प्रशिक्षण दिलवाते हुए इन सभी को सशक्त बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान कोरोनावायरस संक्रमण के संभाव्य प्रसार के मद्देनजर सभी प्रशिक्षण केंद्र बंद हैं तथा जब भी राज्य सरकार के द्वारा इस संबंध में निर्देश प्राप्त होगा तो सभी बच्चियों को सिलाई प्रशिक्षण संस्थान में या रूचि के अनुसार अन्य प्रकार के कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था करते हुए पुनर्वासन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
वापसी आयी लड़कियों ने बताया कि उन्हें चेन्नई की दवा कंपनियों में बंधुआ मजदूर के रूप में बंधक बनाकर रखा गया था और दलाल घर नहीं जाने दे रहे थे। लड़कियों ने बताया कि जब इन्होंने फोन पर परिजन को अपनी पीड़ा बतायी तो उन्होंने घर वापस आने की बात कही। इसके बाद जब लड़कियों ने घर जाने की इच्छा जतायी तो दलाल इन्हें घर नहीं आने दे रहे थे। वे पैसे मांगते थे। बताया कि दलाल उनलोगों से घर पहुंचाने के लिए 7 से 10 हजार रुपए मांगते थे। लड़कियों ने बताया कि परेशान होकर उन्होंने राज्य सरकार की मदद से चलाई जा रही फिया फाउंडेशन के कंट्रोल रूम में फोन किया। वहीं, फिया फाउंडेशन के एक अधिकारी ने बताया कि लड़कियों का कॉल आने के बाद सरकार को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद इन्हें वापस लाने की तैयारी शुरू की गई। श्रम विभाग की मदद से रेस्क्यू की कोशिश की गई।

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