November 24, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

डिजिटल माध्यमों पर केंद्रित रहा संवाद का चौथा दिन डिजिटल सॉल्यूशंस बना चर्चा का प्रमुख बिंदु

जमशेदपुर:- देश के आंतरिक इलाकों के चेंजमेकर्स ने जनजातीय समुदायों के भीतर डिजिटलाइजेशन की एक अंतर्दृष्टि पैदा की है। आज के ‘संवाद’ में विशेषज्ञ और युवा लीडर हमारे साथ ऑनलाइन जुड़े और उन डिजिटल माध्यमों पर चर्चा की, जो आदिवासी समुदायों को एक साथ लाते हैं।
‘हो’ जनजाति से आने वाले बिक्रम बिरुली ने एक वेबसाइट की है। उन्होंने इस बारे में गहनता से बात की कि उन्होंने कोरोनोवायरस महामारी के दौरान जागरूकता पैदा करने के लिए ऑनलाइन माध्यम का उपयोग कैसे किया।
इसी प्रकार, अपना यूट्यूब चैनल चलाने वाले कई युवाओं ने बताया कि समुदायों तक पहुंचने के लिए वे किस प्रकार ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। राजस्थान की भील जनजाति से आने वाले विनोद कुमार ‘कोटड़ा टाइम्स’ नामक यूट्यूब चैनल चलाते हैं और वे अपने चैनल के माध्यम से जनजातीय समुदायों के बीच जागरूकता फैला रहे हैं।

विनोद ने बताया, “मैंने प्रखंड और जिला कार्यालयों से सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की और उन्हें क्षेत्रीय भाषा में अनुवादित किया है और इसे अपने चैनल में डाला। इन्हें, विशेष रूप से हाल ही में लॉकडाउन की अवधि के दौरान मेरे द्वारा डाले गए वीडियो को जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिली है।’’
एक अन्य आदिवासी युवा विक्रम मुर्मू अन्य यूट्यूब चैनल ‘सरना टुडे’ चलाते हैं। उन्होंने आदिवासीवाद से संबंधित चर्चाओं को मुख्यधारा की मीडिया में लाने के लिए इस चैनल को आरंभ किया, जिसमें झारखंड के आदिवासी समुदायों के इतिहास, जीवन के तरीके, सांस्कृतिक समृद्धि को कवर करने के लिए पहल शुरू की गई। उन्होंने अब तक आदिवासी समुदायों और विरासत की कई कहानियों को सफलतापूर्वक कवर किया है।

शेष कार्यक्रम :

कारीगरों के मास्टरक्लास के तहत मध्य प्रदेश से उरांव जनजाति की सुमंती उरांव और झारखंड से ‘हो’ जनजाति से सुनाराम सोरेन ने मिट्टी और लकड़ी के कोयले जैसे प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग कर सोहराई पेंटिंग को एक कैनवास पर चित्रित करने और उंगली से चित्रकारी की उरांव-कला का प्रशिक्षण दिया।
संवाद एक्शन रिसर्च कलेक्टिव में, विशेषज्ञों ने मौखिक साहित्य के महत्व पर चर्चा की और बताया कि कैसे एक्शन रिसर्च की प्रक्रिया के दौरान यह एक बहुत महत्वपूर्ण टूल हो सकता है। ओडिशा में एक पहाड़ी धारा से 3 किलोमीटर लंबी नहर बनाने वाले पद्मश्री दैतारी नायक भी सत्र में शामिल हुए और इस बात पर जोर दिया कि समस्याओं का निदान करने के लिए ‘एक्शन’ किस प्रकार तैयार किए गए मूल्यांकनात्मक, खोजी और विश्लेषणात्मक अनुसंधान विधियों को शामिल करता है।

डॉ अंजना सिंह, हेड, पीजी डिपार्टमेंट ऑफ़ हिस्ट्री, निर्मला कॉलेज, रांची यूनिवर्सिटी, लेप्चा भाषा की टीचर डॉ काच्यो लेप्चा, जिनके नाम 15 प्रकाशन हैं और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई में पीएचडी स्कॉलर श्री मनोज निगाडकर चर्चा में शामिल हुए। फिल्म स्क्रीनिंग ‘समुदाय के साथ’ के अंतर्गत ‘जौहर’ प्रदर्शित किया गया। अभिजीत पात्रो द्वारा निर्देशित यह 20 मिनट का एक एथ्नोग्राफिक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, जो भारत के झारखंड में बसने वाले आदिवासी समूह ‘संथालों’ की दैनिक गतिविधियों और प्रथागत अभ्यासों पर केंद्रित है।

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