November 30, 2020

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JNU हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने खुद को दी क्लीन चिट, यूनिवर्सिटी कैंपस में घुसे थे 100 नकाबपोश लोग

नई दिल्ली:- जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) परिसर के अंदर 5 जनवरी को हुई हिंसा के मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की एक कमेटी ने स्थानीय पुलिस को क्लीन चिट दे दी है। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार JNU हिंसा के लिए स्थानीय दिल्ली पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की थी जिसे इस पूरे मामले से जुड़ी जानकारी और पुलिस पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।
बता दें कि 5 जनवरी को करीब 100 नकाबपोश लोग लाठी-डंडों के साथ यूनिवर्सिटी में घुस आए थे। करीब 4 घंटों तक उन्होंने तोड़फोड़ की थी। इस दौरान36 लोग जख्मी भी हुए थे, जिसमें JNU के छात्र, टीचर और स्टाफ के लोग शामिल थे। इस मामले में FIR के बाद केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया गया था। अबतक इसमें कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे थे। पुलिस पर आरोप लगाया गया था कि पुलिस जानकर यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर नहीं गई थी। इस मामले पर अब दिल्ली पुलिस ने जवाब दिया है। पुलिस पर लापरवाही और हिंसा क्यों और किसके द्वारा की गई…इन सभी मुद्दों पर जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने फैक्ट फाइंडिंग कमिटी बनाई थी। केस को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया गया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने किसी की कोई गिरफ्तारी नहीं की है।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली हिंसा के वक्त उस समय सवाल उठ रहे थे कि आखिर दिल्ली पुलिस परिसर के बाहर ही क्यों खड़ी थी, जब कैंपस के अंदर हिंसा हो रही थी। इसपर क्राइम ब्रांच ने कहा है कि जब जामिया मिलिया इस्लामिया में पुलिस ने कार्रवाई की थी, तो हम पर आरोप लगे थे कि हम बिना अमुमति के जामिया में गए थे। इसलिए जेएनयू में अंदर जाने के लिए हमें यूनिवर्सिटी प्रशासन की इजाजत चाहिए थी। जेएनयू में 5 जनवरी को सुबह 8 बजे से रात तक क्या हुआ, इसपर सभी पुलिसवालों ने एक जैसे बयान दिए हैं।
बता दें कि जामिया मिलिया इस्लामिया में पुलिस कार्रवाई करते हुए कैंपस में घुसी थी। उस वक्त भी पुलिस पर आरोप लगे थे कि उन्होंने लाइब्रेरी के अंदर छात्रों को कथित रूप से पीटा था। इसलिए जेएनयू वाले मामले में पुलिस ने यह सुनिश्चित किया है कि जब उन्होंने दंगाइयों का पीछा करने के लिए जामिया में प्रवेश किया था, तो वे विश्वविद्यालय के अधिकारियों की सहमति के बिना जेएनयू में प्रवेश नहीं कर सकते थे।

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