November 30, 2020

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किशनगंज में विश्व सीओपीडी दिवस पर परामर्श

किशनगंज:- विश्व क्राॅनिक ऑब्स्ट्रक्टिब पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी) दिवस पर किशनगंज में पश्चिम पाली चौक स्थित क्लीनिक पर छातीरोग विशेषज्ञ सह भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के जिला उपाध्यक्ष डाॅ शिव कुमार ने बुधवार को आमजनों को परामर्श दिया।

उन्होंने कहा कि आम जन मानस को यह ज्ञात होना चाहिए कि यह (सीओपीडी) फेफड़े की ऐसी बिमारी है जिसकी रोकथाम व प्रबंधन किया जा सकता है। यह खतरनाक भी हो सकती हैं और बढ़ सकती है। इसके कारण फेफड़ों में श्वशन नलिकाओं में प्रदाह होने लगता है।क्योंकि नली सकरी हो जाती हैं। (जो क्राॅनिक ब्राॅकाइटिस)जिस कारण हवा की थैलियां क्षतिग्रस्त हो जाती है और स्वास्थ्य को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है। फेफड़ों को भी पर्याप्त ऑक्सीजन नही मिल पता है जिसके कारण रक्त का सुधीकरण भी संभव नही हो सकता है। इस स्थिति में शरीर के विभिन्न तंत्र भी प्रभावित हो कर जानलेवा साबित हो जाते हैं।
डाॅ कुमार ने कहा कि वर्ष 2016 भारत में सीओपीडी (पुरानी श्वसन संबंधित बीमारी)डीएएलवाई 75.6फीसदी के लिए जिम्मेदार थी और फिर यहां भारत में सीओपीडी के मामलों की संख्या 28.1फीसदी मिलियन से बढ़कर सीधे वर्ष 2016 ई.में 55.। फीसदी मिलियन हो गई।यानि यह रोग की बृद्धि 3.3फीसदी से बढ़कर 4.2फीसदी हो।वहीं भारत में वर्ष 2016 के मुकाबले दुनियां के औसतन 1.7गुणा अधिक थी।

इसीलिए कोविड-19 महामारी काल में इस जानलेवा रोग को नजर अंदाज कर देना उचित नहीं होगा। इसीलिए आम जन मानस में इस बीमारी के प्रति भारत सरकार के द्वारा जागरूकता प्रबंधन अनिवार्य होगा और लोगों के लिए भी जो इस बीमारी की घातक चपेट में नही आना चाहते हैं उनको धूऑ, धूल व प्रदूषित हवा , ध्रुमपान करने वाले लोग और ध्रुमपान करने वालों लोग के संपर्क से सावधान रहना चाहिए। भारत सरकार की उज्ज्वला योजना से देश में गरीबी रेखा नीचे धरेलू माता- बहनों को राहत तो जरूर मिली है । यदि आज भी कुछ घरेलू माताओं व बहनों ऐसे प्रदूषित हवा में जीवन यापन कर रही हैं तो उन्हें भी विश्व सीओपीडी दिवस पर अपने परामर्श से लाभ पहुंचाना ही मेरा उदेश्य है। साथ ही यदि कोई इस बीमारी के चपेट में आ भी गया है तो उचित इलाज व सावधानी से पूरी जिन्दगी कुशलता से जी सकेगा।

संवाददाता सुबोध

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