November 26, 2020

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BPCL को खरीदने के लिए कई कंपनियों ने लगाई बोली, रिलायंस और अरामको ने नहीं दिखाई दिलचस्पी

नयी दिल्ली:- सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड की हिस्सेदारी खरीदने के लिए कई कंपनियों ने बोलियां लगाई हैं। हालांकि देश के सबसे रईस शख्स मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इससे दूरी बना ली है। इसके अलावा सऊदी अरब की कंपनी सऊदी अरामको, ब्रिटिश पेट्रोलियम और Total जैसी कंपनियों ने भी इसमें रुचि नहीं जताई है।

डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट ऐंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट के सेक्रेटरी तुहीन कांत पांडे ने कहा कि कंपनी की 52.98 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए कई बोलियां मिली है। उन्होंने कहा कि ट्रांजेक्शन अडवाइजर्स की ओर से आवेदनों का आकलन करने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इसे लेकर ट्वीट करते हुए कहा, ‘बीपीसीएल का रणनीतिक विनिवेश प्रगति पर है, कई बोलियां मिलने के बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।’
हालांकि वित्त मंत्री या फिर डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट ने यह जानकारी नहीं दी है कि कितनी बोलियां मिली हैं और किन लोगों ने इसके लिए बोली लगाई है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक 3 से 4 बोलियां बीपीसीएल के लिए हासिल हुई हैं। हालाांकि देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई है। सोमवार को बीपीसीएल के लिए बोली सौंपने का आखिरी दिन था। भारत के मार्केट में पहले एंट्री करने में दिलचस्पी दिखाने वाली सऊदी अरामको ने भी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसके अलावा ब्रिटिश पट्रोलियम और फ्रांस की कंपनी Total ने पहले ही बीपीसीएल की हिस्सेदारी खरीदने से दूर रहने की बात कही थी। हालांकि दोनों ही कंपनियां भारत के फ्यूल मार्केट में एंट्री की योजना बना रही हैं।

दरअसल ब्रिटिश पेट्रोलियम और Total का कहना था कि वह ऐसे वक्त में लिक्विड फ्यूल की ओर नहीं बढ़ सकतीं, जब दुनिया में इसका प्रचलन कम हो रहा है। ऐसे में वह ऑयल रिफाइनिंग एसेट्स नहीं बनाना चाहते। कहा जा रहा है कि बीपीसीएल में निवेश के लिए कुछ प्राइवेट इक्विटी फंड्स ने बोली सौंपी है। रूसी दिग्गज कंपनी रोजनेफ्ट को भी शुरुआती दौर में बीपीसीएल की हिस्सेदारी खरीदने का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन बीते महीने ही कंपनी ने इस बात से इनकार कर दिया था।
भारतीय बाजार में एंट्री की महत्वाकांक्षा रखने वाली अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी को संभावित दावेदार माना जा रहा था, लेकिन कंपनी ने बोली लगाई है या फिर नहीं, इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है। सूत्रों का कहना है कि हिस्सेदारी खरीदने के लिए जो बोलियां मिली हैं, उनका आकलन ट्रांजेक्शन अडवाइजर्स की ओर से किया जाएगा। उसके बाद यह तय किया जाएगा कि संबंधित कंपनियां जरूरी शर्तों को पूरा करती हैं या फिर नहीं। इस प्रक्रिया में दो से तीन सप्ताह का वक्त लग सकता है। उसके बाद फाइनेंशियल बोलियां आमंत्रित की जाएंगी।

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