November 24, 2020

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कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नियमित हाथ धोना, मास्क लगाना और 2 गज की दूरी सबसे अनिवार्य

रांची:- पत्र सूचना कार्यालय व रीजनल आउटरीच ब्यूरो, रांची तथा फील्ड आउटरीच ब्यूरो, धनबाद के संयुक्त तत्वावधान में ’कोविड -19ः योग्य व्यवहार ’ विषय पर आज वेबिनार परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में स्वास्थ, शिक्षा एवं जनसंचार क्षेत्र से जुुड़े प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों का कहना था कि कोरोना जन आंदोलन को सफल बनाने के लिए सभी को अच्छी तरह से मुंह तथा नाक ढक कर रहना, 2 गज की दूरी बनाए रखना एवं नियमित हाथ धोते रहना अति आवश्यक है। और साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र “जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं“ को याद रखना है।

अतिथियों के स्वागत और वेबिनार परिचर्चा की शुरुआत करते हुए अपर महानिदेशक पीआईबी- आरओबी, रांची अरिमर्दन सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी में लॉकडाउन से गुजरने के बाद अब हम लोग अनलॉक के दौर में है। आवश्यकता इस बात की है कि हम लोगों को लगातार सुरक्षा के उपायों को अपनाना है क्योंकि शत्रु जितना भी छोटा हो, खतरनाक होता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का लगातार आह्वान है कि “जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं“ और हमें इस पर अमल करना है। अपर महानिदेशक ने इस बात पर भी बल दिया की साबुन से हाथ धोना, सही तरीके से मास्क पहनना तथा दो गज की दूरी को बनाए रखना कोरोना से बचने के सबसे अच्छे उपायों में से है। साथ ही घर में बड़े बुजुर्गों का खास ख्याल रखना भी जरूरी है क्योंकि उनको इस बीमारी से अधिक खतरा है और फिर संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। कोविड-19 महामारी के बीच योग्य व्यवहार को जन आंदोलन के रूप में बदलना है और समुचित व्यवहार का संदेश देश के तमाम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करना है, तभी कोरोना के संबंध में योग्य व्यवहार का जन आंदोलन सफल हो सकता है।
रिनपास रांची के क्लीनिकल साइकोलॉजी के प्रोफेसर अमूल रंजन सिंह ने बताया कि कोरोना काल में बहुत सारे लोग मानसिक तथा मनोवैज्ञानिक समस्याओं से परेशान हुए। लोग काफी डरे हुए थे और उन्हें यह लग रहा था कि यह बीमारी उन्हें भी अपने चपेट में ले लेगी। प्रोफेसर अमूल ने कहा कि हालांकि पहले की तुलना में अब डर का माहौल कम हुआ है लेकिन अभी भी कोरोना से बचने के लिए हमें सुरक्षा के सारे उपायों को लगातार अपनाते रहना होगा। मानसिक व मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों से गुजर रहे व्यक्ति के लिए यह जरूरी है कि उसे पारिवारिक और सामाजिक साथ मिलता रहे और वो “कम्युनिकेशन“ एवं “सोशलाइजेशन“ करे। ऐसे व्यक्ति को हमेशा साहस दिलाते रहना है और उसे कभी भी अकेलापन महसूस होने नहीं देना है। आपसी मदद और एक दूसरे का साहस बनाकर ही हम कोरोना काल में मानसिकता तथा मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों से उबर सकते हैं।

रिम्स रांची के मेडिसिन के प्रोफेसर डॉक्टर संजय कुमार सिंह ने कहा कि कोविड-19 के योग्य व्यवहार के अंतर्गत हमें लगातार अपने हाथों को धोते रहना है। अगर हमें कभी भी कोरोना संक्रमण का खतरा हो तो पानी पीते रहना है ताकि जो वायरस है वो गले के रास्ते फेफड़े में ना जाकर पेट में चला जाए। साथ ही बाहर निकलने पर हमेशा मास्क लगाना है, जिससे मुंह और नाक अच्छी तरह ढकें हों। कई लोग नाक को पूरी तरह नहीं ढकते, इससे संक्रमण का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि उनके अस्पताल में इस संक्रमण से मरने वाले मरीजों का दर देश में सबसे कम है।
मां रामप्यारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, रांची की प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ आरती ज्योति ने बताया कि कोविड-19 पॉजिटिव गर्भवती महिला से बच्चे को कोरोना संक्रमण का कोई केस सामने नहीं आया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के गाइड लाइन में भी यह बात साफ है कि कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला से गर्भ में पल रहे बच्चे को कोरोना ट्रांसफर नहीं होता है। अगर महिला बहुत ज्यादा बीमार हो और वेंटिलेटर आदि पर हो तब विशेष इलाज और सुरक्षा की जरूरत पड़ती है। सामान्य स्थिति में ऐसा माना जाता है कि गर्भवती महिला अगर कोरोना संक्रमित है तो उससे बच्चे को कोई असर नहीं पड़ेगा और वो सारे एहतियात के साथ उसे अपना दूध भी पिला सकती है।

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