November 26, 2020

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दीपावली पर ओडिशा को मिली नए केंद्रीय विद्यालय की सौगात

गंजाम जिले में खुलेगा देश का 1245वां केंद्रीय विद्यालय

लॉकडाउन के बावजूद अप्रैल से अब तक 10 केंद्रीय विद्यालय खुले

1242 भारत के विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में जबकि 3 काठमांडू, मॉस्को और तेहरान में

नई दिल्ली:- केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से ओडिशा के गंजम जिले में केंद्रीय विद्यालय छत्रपुर खोलने के आदेश शुक्रवार को जारी किये गये। इसके साथ ही कोविड-19 और लॉकडाउन के बावजूद इस साल अप्रैल से अब तक 10 केंद्रीय विद्यालय खोले जा चुके हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि केंद्रीय विद्यालयों की विशाल श्रृंखला में यह देश का 1245वां केंद्रीय विद्यालय होगा। निशंक ने कहा, केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) द्वारा ओडिशा के गंजाम जिले में केंद्रीय विद्यालय छत्रपुर के रूप में एक नया विद्यालय खोलने के आदेश जारी किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा, मेरा विश्वास है कि दीपावली के पावन पर्व पर अस्तित्व में आ रहा यह विद्यालय संपूर्ण क्षेत्र में शिक्षा की एक नई ज्योति प्रकाशित करेगा। मैं गंजाम जिले के समस्त क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।
केंद्रीय विद्यालय के प्रवक्ता सचिन अरोड़ा ने हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में बताया कि 31 मार्च 2020 तक कुल 1235 केंद्रीय विद्यालय थे। एक अप्रैल से शुरू हुए नए अकादमिक वर्ष में अब तक कुल 10 केंद्रीय विद्यालय खोले जा चुके हैं। इससे केंद्रीय विद्यालयों का आंकड़ा बढ़कर 1245 पर पहुंच गया है। इसमें से तीन केंद्रीय विद्यालय काठमांडू, मॉस्को और तेहरान में स्थित हैं।

नया केंद्रीय विद्यालय खोलने की प्रक्रिया

उन्होंने बताया कि केंद्रीय विद्यालय खुलवाने के लिए इच्छुक राज्य सरकार अथवा अन्य एजेंसी को विद्यालय के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन को निशुल्क भूमि का आवंटन करना होता है। इसके बाद उस स्थान की सड़क से दूरी बिजली के तारों और पानी आदि की व्यवस्था का जायजा लिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यालय को चलाने के लिए अस्थायी भवन भी उपलब्ध कराना होता है। प्रवक्ता ने बताया कि अस्थायी भवन की व्यवस्था होने पर नया विद्यालय खोलने का आदेश जारी कर दिया जाता है। इसके साथ ही स्थाई भवन में पहली से पांचवी कक्षा तक के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाती है। वहीं दूसरी ओर आवंटित भूमि पर निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। उसके तैयार होने तक विद्यालय उसी अस्थाई इमारत में चलता रहता है। औसतन ढाई से 4 साल में केंद्रीय विद्यालय की इमारत बनकर तैयार हो जाती है।

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