November 28, 2020

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सरना कोड लागू नहीं हुआ, तो 6 दिसंबर को रेल चक्का जाम की चेतावनी

रांची:- केंद्र सरकार सरना कोड लागू नहीं करती है तो 6 दिसंबर को रेल चक्का जाम किया जाएगा। यह घोषणा प्रेस क्लब में आदिवासी संगठनों की हुई बैठक के बाद लिया गया। केंद्रीय सरना समिति, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद व आदिवासी सेंगेल अभियान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बैठक में सरना कोड लागू करने की मांग की गई। बैठक में 5 राज्य असम, बिहार, बंगाल, उड़ीसा तथा झारखंड के सरना धर्मावलंबी ने भाग लिया। सभी ने सरना धर्म कोड पर अपनी सहमति जताई एवं सर्वसम्मति से इसे लागू करने की मांग की गई। सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि आदिवासी अपनी अस्तित्व पहचान भाषा संस्कृति अपने अधिकार के लिए लंबे समय से सरना धर्म कोड की लड़ाई लड़ रहे हैं। सरना कोड के लेकर ही सबसे ज्यादा आंदोलन किया गया है। जिसके कारण पूरे भारत के आदिवासी जागरूक हुए हैं। अपनी मांग को लेकर केंद्र सरकार सरना कोड लागू नहीं करती है तो 6 दिसंबर को रेल चक्का जाम आदिवासी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन कर रहे हैं। इसी का देन है कि झारखंड सरकार विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्म कोड विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भेजने को बाध्य हुई हैं। पूर्व सांसद एवं आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कहा कि सरना कोड भारत सरकार के द्वारा ही तय होनी है। अतरू भारत के आदिवासी जनता जो प्राकृतिक पूजा में विश्वास करते हैं। और हिंदू, मुस्लिम, इसाई आदि नहीं है। उन्हें एकजुट होकर 6 दिसंबर को आहूत राष्ट्रव्यापी रेल चक्का जाम के लिए तैयार हो जाना होगा। वरना 2021 की जनगणना में फिर हमें अपनी मौलिक और मानवीय अधिकारों से वंचित होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अभी सबको करो या मरो की तर्ज पर सामने आना पड़ेगा। कोई किसी भी नाम से आदिवासियों के धार्मिक स्थिति पहचान हिस्सेदारी की मांग कर रहा है। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के महासचिव सत्यनारायण लकडा ने कहा कि 2021 जनगणना का वर्ष है। आदिवासी के पास 2 महीने का समय है। सरना धर्म कोड लागू करने के लिए आदिवासी करो या मरो की तर्ज पर आंदोलन करने को बाध्य हैं। झारखंड सरकार को जल्द से जल्द विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भेजें। केंद्रीय सरना समिति, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद एवं आदिवासी सेंगेल अभियान के संयुक्त तत्वावधान में केंद्र सरकार को दबाव बनाने एवं ध्यान आकृष्ट करने के लिए 6 दिसंबर को रेल चक्का जाम का निर्णय लिया गया है। केंद्रीय सरना समिति के महासचिव संजय तिर्की ने कहा कि आदिवासी किसी भी हाल में 2021 में सरना धर्म कोड चाहते हैं। जिसके कारण आदिवासी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन कर रहे है।

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