November 27, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

लोकल फॉर वोकल और आत्मनिर्भर बिहार को गति देने में जुटे कुंभकार परिवार

बेगूसराय:- कोरोना और डेंगू के बढ़ते कहर के बीच 14 नवम्बर को मनाए जाने वाले महालक्ष्मी की आराधना और दीपों के पर्व दीपावली की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई है। घर और दुकान में साफ सफाई और रंग-रोगन का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। बाजार सज चुके हैं, व्यवसायियों ने धनतेरस के लिए विशेष तैयारी शुरू कर दी है, वाहनों की एडवांस बुकिंग हो रही है। दीपावली के दिन घरों को सजाने के लिए बाजार में रंग बिरंगी लाइट भी आ गई है। इन सब के बीच कुंभकारों के घर भी रौनक छाने लगी है। कोरोना के कारण बाहरी सामानों के आने पर लगी रोक और प्रधानमंत्री द्वारा लोकल फॉर वोकल का नारा से इस बार दीप का कारोबार अधिक होने की उम्मीद है। जिला के पांच हजार से अधिक कुंभकार परिवार दिन रात एक कर लक्ष्मी पूजन और घर सजाने के लिए दीप बना रहे हैं, लक्ष्मी पूजा के लिए कलश बनाने का काम भी तेजी से हो रहा है। कुंभकार परिवार के युवा जहां चाक चलाने में मशगूल हैं। बुजुर्गों ने मिट्टी गूंथने का काम संभाला है, जबकि महिलाएं और बच्चे इन दीप और कलश को सुखाने तथा भट्ठी लगाकर पकाने के बाद उसे रंगने में मशगूल हैं। हालांकि चाइनीज दीपों के बढ़ते चलन ने इन परिवारों पर वज्रपात कर दिया है। चाइनीज दीप और लाइट लोगों को आकर्षित करती रही है और लोगों का बड़ी संख्या में इस ओर झुकाव भी रहा है जिससे स्वदेशी उत्पाद एवं लोकल उत्पाद की बिक्री पर लगातार प्रश्न चिन्ह लगता जा रहा था लेकिन इस बार कोरोना के कारण देश प्रेम से ओतप्रोत लोग मिट्टी के बने स्थानीय दीए की ओर आकर्षित होंगे। जिस कारण दीपावली के 15 दिन पहले से कुंभकार परिवारों में दिपावली के लिए दीप बनाने का काम तेजी से शुरू है। दीप बनाकर और तैयार होने के बाद यह लोग गांव गांव जाकर लोगों को घर तक उपलब्ध करवाते हैं, वह भी सस्ते दाम पर। स्थानीय कुंभकारों द्वारा मिट्टी से द्वारा बनाए गए दीप मात्र एक से डेढ़ रुपया तक में उपलब्ध हो रहा है। चांदपुरा के कुंभकार वरुण पंडित, विपिन पंडित, राधे पंडित, रुणा देवी, ललिता देवी आदि ने बताया कि चाइनीज उत्पाद ने हम लोगों के रोजी-रोटी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था जिससे कारण हमारे घर के भी युवा इस पारंपरिक पेशा से दूर होकर परदेश जाने के लिए मजबूर थे लेकिन प्रधानमंत्री के नारा से कारोबार अच्छा होने की उम्मीद है। इसके कारण कार्तिक महीना आते ही हम पूरा परिवार में एकत्रित होकर मिट्टी के दीए बनाकर लोगों को स्वदेशी उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इनका कहना है कि हम आत्मनिर्भर होने का प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व देश के सभी वर्गों का समग्र विकास हो रहा है। मिट्टी से बने स्वास्थ्य और पर्यावरण वर्धक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मिट्टी के कप और ग्लास निर्माण पर जोर दिया है। हम लोकल फॉर वोकल और आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर बिहार के प्रति सजग और सतर्क हैं। हमारे उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध करवा दिए जाएं तो हम कुंभकारों के परिवार में खुशियां लौट सकती हैं।

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