November 30, 2020

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जमशेदपुर नगर निगम या औद्योगिक नगर व्यवस्था को लेकर बैठक आज

विधायक सरयू राय बिहार चुनाव में प्रचार छोड़ कर वापस लौटे

जमशेदपुर:- झारखंड सरकार द्वारा जमशेदपुर में नगर निगम या औद्योगिक नगर व्यवस्था गठन के लिये सरकार और टाटा स्टील के बीच आगामी 2 नवम्बर को हो रही बैठक के मद्देनज़र विधायक सरयू राय ने बिहार चुनाव प्रचार का कार्यक्रम बदल कर कल राँची पहुंचने का फ़ैसला किया है।
आज नालंदा विधान सभा क्षेत्र के नूरसराय प्रखंड के बघार, सकरौढ, खेदूबिगहा, सैदपुर आदि ग्रामीण इलाक़ों का दौरा पूरा करने के बाद उन्होंने सहरसा, हाजीपुर, समस्तीपुर, अररिया आदि क्षेत्रों का चुनावी कार्यक्रम स्थगित कर दिया. आगामी 2 नवम्बर को वे राँची लौट आयेंगे।
सरयू राय ने कहा है कि जमशेदपुर में लंबे समय से चल रही अवैध एवं ग़ैरक़ानूनी जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति की जगह वैधानिक नगरपालिका व्यवस्था स्थापित करने के लिये उन्होंने गत मार्च महीना में पहल किया था। उसके बाद कई बार उनकी वार्ता इस बारे में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और नगर विकास विभाग के सचिव से हुई। अब जाकर 2 नवम्बर को इस मुद्दे पर सरकार और टाटा स्टील प्रबंधन के बीच पहली बैठक हो रही है। मेरा सुझाव है कि सरकार इस संबंध में संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों का अक्षरशः पालन करे और क़ानून का पूरी तरह पालन करे।
1972 से लेकर आजतक समय समय पर जमशेदपुर में नागरिक स्वशासन, टाटालीज, मालिकाना आदि मामलों में पहल हुई, परंतु हर बार राजस्व एवं भूमि सुधार क़ानूनों के संवैधानिक पहलुओं की अनदेखी कर कामचलाऊ रास्ता अपनाया गया। ऐसे क़ानून बनाकर लागू कर दिये गये जिन्हें संविधान का संरक्षण नही है। ऐसे समझौते लागू कर दिये गये जिनके प्रावधान भूमि सुधार अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। इन समझौतों में इसकी व्यवस्था नहीं की गई कि जनता को उसका हक़ कैसे मिलेगा और यदि जनता के हक में कटौती होती है तो लोग इसकी शिकायत कहाँ करेंगे और इसपर फ़ैसला कौन करेगा। नतीजा है कि जो दबंग है, जो राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं,जो गिरोह बनाकर अनियमितता करने में निपुण हैं उनकी मनमानी चलती रही। उन्हें रोकने टोकने के लिये कोई प्रावधान नहीं किया गया।
इसका नतीजा है कि जमशेदपुर भूमि संबंधित मामलों में अनियमितताओं का शहर बन गया है, चप्पे चप्पे पर अनियमितताये पसरी हुई दिखती हैं। आम आदमी इनके सामने बेबस और लाचार है। अधिकार विहीन सरकारी तंत्र भी इनके सामने बेबस और लाचार है। समझौता के अनुपालन की व्यवस्था नहीं होने के कारण सामान्य जन किंकर्तव्यविमूढ़ है। इसके कारण सरकार को हर साल अरबों रूपये के राजस्व का नुक़सान हो रहा है।
नागरिक स्वशासन की भावना के अनुरूप नगरपालिका व्यवस्था और औद्योगिक शहर की अवधारणा को मूर्त रूप देते समय संविधान और नियम के प्रवाधानों की वैसी अनदेखी पुनः नहीं होनी चाहिये जो 1972 में, 1981 में, 1984 में, 1985 में और 2005 में हुई है। जमशेदपुर की जनता को और जमशेदपुर में विकास को पूर्व की तरह का नुक़सान नहीं होना चाहिये, यह मेरा प्रयास होगा।
सरकारी और प्रशासनिक तंत्र को इस मामले में समग्रता से विचार करना होगा, टुकडे में नहीं,नहीं तो एक समस्या सुलझाने का प्रयास होगा और कई अन्य समस्यायें इससे पैदा हो जायेंगी। सरकार पूछे या न पूछे एक जनप्रतिनिधि के नाते मैं सामान्य जनता के हक़ की बातों को दृढ़ता के साथ रखूँगा और शासन-प्रशासन पर इस बार के प्रयास में राज्यहित और जनहित के आलोक में नियमित तरीक़ा अपनाने के लिये तैयार करूँगा। ताकि मामला के पुनः क़ानूनी पचड़े में उलझने की संभावना नहीं बने।
उनका प्रयास है कि जमशेदपुर में नियम क़ानून से काम हो। सरकार हो, कम्पनियाँ हों, राजनीति में प्रभाव रखने वाले लोग हों या शासन-प्रशासन हो सभी संविधान और क़ानून का पालन करें। ऐसा होगा तभी आम आदमी को उसका हक़ मिलेगा। इसकी शुरूआत जमशेदपुर को नगर निगम या औद्योगिक शहर बनाने की प्रक्रिया से होनी चाहिये। यही इस मामले में सरकारी तंत्र से मेरा अनुरोध है।

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