November 26, 2020

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पहले चरण में महागठबंधन को निर्णायक बढ़त, रोजगार बना बड़ा मुद्दा : दीपंकर

पटना:- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मर्क्सवादी- लेनिनवादी (भाकपा-माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने दावा किया कि महागठबंधन के रोजगार समेत अन्य मुद्दे उठाने से लोगों में भारी उम्मीद जगी है और इसी का परिणाम है कि बिहार विधानसभा के प्रथम चरण चुनाव में उसे निर्णायक बढ़त मिली है। श्री भट्टाचार्य ने शनिवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विधानसभा के पहले चरण के चुनाव में महागठबंधन ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। शाहाबाद और मगध क्षेत्र से मिल रही सूचनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार बिहार से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की विदाई तय है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन ने रोजगार सहित जिन मुद्दों को उठाया उससे लोगों में भारी उम्मीद जगी है। बिहार के लोग आज सुरक्षित एवं सम्मानजनक रोजगार चाहते हैं और यही वजह है कि आज पहली बार भावनात्मक मुद्दों की जगह जनता के असली मुद्दे चुनाव के एजेंडे पर हैं। भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि राजग सरकार में बिहार में 45 प्रतिशत से अधिक बेरोजगारी है। प्रवासी मजदूरों को न तो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना के तहत काम मिला न ही कहीं और। नियोजित एवं अतिथि शिक्षकों की सबसे खराब स्थिति बिहार में ही है। कर्मचारियों, आशा- आंगनबाड़ी- रसोइयाें की मांग को लेकर लगातार आंदोलन चला है और इस बार ये चुनाव के प्रमुख मुद्दे हैं। महागठबंधन के संकल्प पत्र से एक बेहतर शुरुआत हुई है। यही कारण है कि ये सभी वर्ग के लोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के खिलाफ महागठबंधन के पक्ष में गोलबंद हो रहे हैं। श्री भट्टाचार्य ने कहा कि राजग के चुनाव प्रचार की शैली और गिरते भाषाई स्तर से भी बिहार के लोग दुखी हैं। राजग नेताओं को अपने काम के आधार पर वोट मांगना चाहिए था लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिस भाषा में बात कर रहे हैं, उसे लोग पसंद नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि भाजपा के लोग भी कह रहे हैं कि उनके नेता इस तरह से बात करेंगे उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। उन्होंने सभा और रैली में हो रही भीड़ को लेकर निशाना साधा और कहा कि 28 अक्टूबर को प्रथम चरण के चुनाव के समय पटना के वेटनरी काॅलेज में प्रधानमंत्री की सभा हो रही थी। निर्वाचन आयोग को देखना चाहिए कि चुनाव प्रक्रिया के साथ ऐसा मजाक नहीं होना चाहिए। वोट के लिए इस तरह से सारे नियम-कानून को खत्म कर देना ठीक नहीं है।

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