December 4, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

भारत को एकीकृत करने में सरदार पटेल ने सशक्त भूमिका निभाई

रांची:- पत्र सूचना कार्यालय व रीजनल आउटरीच ब्यूरो, रांची तथा फील्ड आउटरीच ब्यूरो, गुमला के संयुक्त तत्वावधान में ’सरदार पटेल और राष्ट्रीय एकता’ विषय पर शुक्रवार को वेबिनार परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में शिक्षा एवं जनसंचार क्षेत्र से जुुड़े प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों का कहना था कि भारत को एकीकृत करने में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने एक सशक्त भूमिका निभाई जिसके लिए हम उन्हें भारत का दूसरा समुद्रगुप्त भी कह सकते हैं।
वेबिनार परिचर्चा की शुरुआत करते हुए अपर महानिदेशक पीआईबी- आरओबी अरिमर्दन सिंह ने कहा कि आज हम एक महान शख्सियत को याद कर रहे हैं जिन्होंने अपनी सूझबूझ, इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प से आजादी के बाद देश के नव निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी के समय देश में 550 से अधिक रियासतें थीं, इनमें से कुछ रियासतों का क्षेत्रफल 10 वर्ग मील से भी कम था। यह सरदार पटेल की दूरदर्शिता और सूझबूझ से किए गए कार्यों का ही नतीजा था कि लगभग बिना खून बहाए सरदार पटेल ने इन रियासतों को भारत के साथ मिलाने में सफलता पाई। अपर महानिदेशक ने सरदार के जीवन की एक घटना का वर्णन करते हुए बताया कि कोर्ट में जिरह के दौरान उन्हें अपनी पत्नी के निधन का समाचार प्राप्त हुआ। जिसे पढ़कर वो पुनः अपने काम पर लगे रहे। बाद में जज ने पूछा कि जिरह के दौरान आपको किसी ने पर्ची थमाया था, क्या मैं जान सकता हूं कि उस पर्ची में क्या लिखा था। सरदार पटेल ने कहा कि इसमें मेरी पत्नी के निधन का समाचार था। यह सरदार पटेल का ही व्यक्तित्व था कि इतनी बड़ी दुःख भरी जानकारी मिलने के बाद भी वह अपने कर्तव्य के निष्पादन में लगे रहे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर संजीव कुमार तिवारी ने बताया कि हैदराबाद के अपवाद को छोड़ कर सरदार पटेल ने बिना खून बहाए भारत के 565 राजवाड़ों का विलय भारत में सुगमता से किया। सरदार का बचपन कठिन परिस्थितियों में गुजरा। उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास की। उन्होंने त्याग कर अपनी जगह अपने बड़े भाई को वकालत की पढ़ाई करने लंदन भेजा। अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ने बाढ़, शिक्षा आदि क्षेत्रों में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।
1917 में सरदार पटेल गांधी जी के संपर्क में आए और गांधी जी के आंदोलन के तरीकों से बहुत प्रभावित हुए। 1928 में बारडोली किसान आंदोलन सरदार पटेल के जीवन का एक महत्वपूर्ण काल है जिसमें वे अनुशासन ,सत्याग्रह और अहिंसा के बल पर अंग्रेजों से किसानों की मांग पूरी करवाने में सफल हुए, जिसमें अंग्रेजों द्वारा कब्जा की गई जमीनों का मुक्त कराया जाना और बंदियों का जेल से छुड़ाना शामिल था। इसी के पश्चात उन्हें किसानों ने “सरदार“ की उपाधि दी।
यह सरदार पटेल की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम था कि उन्होंने अंग्रेजों के समय के कुछ इंस्टिट्यूशंस को भंग नहीं किया जैसे ब्यूरोक्रेसी का तरीका और आईसीएस द्वारा शीर्ष प्रशासन को चलाया जाना। भारत के लिए संविधान तैयार करने में बाबासाहेब आंबेडकर के अतिरिक्त राजेंद्र प्रसाद, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद की अहम भूमिका रही। उन्होंने संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाई और हिंदू मुस्लिम यूनिटी, संघ को अधिक शक्तियां, उर्दू भाषा को बढ़ावा देना आदि में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने भारत के कई प्रिंसली स्टेट्स जैसे ट्रावनकोर, जोधपुर, जूनागढ़, हैदराबाद को साथ जोड़ा। भारत की आज़ादी के पश्चात वे गृह मंत्री, उप प्रधानमंत्री बने और विभिन्न समस्याओं के बीच शांति बना कर भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखा।

Recent Posts

%d bloggers like this: