November 25, 2020

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पुलवामा हमले के बाद राजनीतिक स्वार्थ तलाशने में जुटे थे कुछ दल : प्रधानमंत्री

नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुलवामा हमले को लेकर पाकिस्तान की संसद में हुए खुलासे के बाद शनिवार को विपक्षी दलों को खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि पुलवामा हमले के बाद राजनीतिक स्वार्थ के लिए अनाप-शनाप बोलने वाले दलों की आंख शायद खुल गई होगी कि अपने स्वार्थ के लिए, जाने-अनजाने देशविरोधी ताकतों की हाथों में खेलकर, न वे देश का हित कर पाएंगे और न ही अपने दल का। उन्होंने कहा कि हमें ये हमेशा याद रखना है कि हम सभी के लिए सर्वोच्च हित- देशहित है। मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर गुजरात के केवडिया में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज यहां जब वे अर्धसैनिक बलों की परेड देख रहे थे, तो उनके मन में एक और तस्वीर थी। ये तस्वीर थी पुलवामा हमले की। देश कभी भूल नहीं सकता कि जब अपने वीर बेटों के जाने से पूरा देश दुखी था, तब कुछ लोग उस दुख में शामिल नहीं थे, वो पुलवामा हमले में अपना राजनीतिक स्वार्थ देख रहे थे। देश भूल नहीं सकता कि तब कैसी-कैसी बातें कहीं गईं, कैसे-कैसे बयान दिए गए। मोदी का इशारा कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर था। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश भूल नहीं सकता कि जब देश पर इतना बड़ा घाव लगा था, तब स्वार्थ और अहंकार से भरी भद्दी राजनीति कितने चरम पर थी। किंतु पिछले दिनों पड़ोसी देश से जो खबरें आईं हैं, जिस प्रकार वहां की संसद में सत्य स्वीकारा गया है, उसने इन लोगों के असली चेहरों को देश के सामने ला दिया है। अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए, ये लोग किस हद तक जा सकते हैं, पुलवामा हमले के बाद की गई राजनीति, इसका बड़ा उदाहरण है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की संसद में चर्चा के दौरान वहां की सरकार ने पुलवामा हमले को पाकिस्तान की बड़ी कामयाबी बताया दिया था। मोदी ने विपक्षी दलों को नसीहत देते हुए कहा कि वे ऐसे राजनीतिक दलों से आग्रह करते हैं कि देश की सुरक्षा के हित में, सुरक्षाबलों के मनोबल के लिए, कृपा करके ऐसी राजनीति न करें, ऐसी चीजों से बचें। उन्होंने कहा कि अपने स्वार्थ के लिए, जाने-अनजाने आप देशविरोधी ताकतों की हाथों में खेलकर, न देश का हित कर पाएंगे और न ही अपने दल का। उन्होंने कहा कि हमें ये हमेशा याद रखना है कि हम सभी के लिए सर्वोच्च हित-देशहित है। मोदी ने कहा कि आज भारत की भूमि पर नज़र गड़ाने वालों को मुंहतोड़ जवाब मिल रहा है। आज का भारत सीमाओं पर सैकड़ों किलोमीटर लंबी सड़कें बना रहा है, दर्जनों ब्रिज, अनेक सुरंगें बना रहा है। अपनी संप्रभुता और सम्मान की रक्षा के लिए आज का भारत पूरी तरह तैयार है।

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