November 27, 2020

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बेगूसराय में दांव पर लगी है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मित्रता की प्रतिष्ठा

बेगूसराय:- बेगूसराय में द्वितीय चरण के तहत तीन नवम्बर को चुनाव होना है। चुनाव में अब मात्र आठ दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में सातों विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक सरगर्मी उफान पर है। सभी जगह महागठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच आमने-सामने की टक्कर है। लेकिन तेघड़ा, चेरिया बरियारपुर, मटिहानी और साहेबपुर कमाल में लोजपा ने प्रत्याशी देकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है जबकि, बछवाड़ा में दोनों गठबंधनों को निर्दलीय प्रत्याशी शिव प्रकाश गरीबदास से टक्कर मिल रही है। सभी विधानसभा क्षेत्रों में कश्मकश की स्थिति है। तेघड़ा विधानसभा क्षेत्र में ना सिर्फ कश्मकश की हालत है बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। 2015 के चुनाव में जदयू और राजद साथ चुनाव लड़ रही थी, तो मुख्यमंत्री के कॉलेज के जमाने के मित्र वीरेंद्र कुमार को राजद के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ाया गया था और वे जीत गए थे। इस बार एनडीए गठबंधन में यह सीट जदयू के हिस्से में आई और वीरेंद्र कुमार राजद छोड़कर जदयू में आ गए। उन्हें तेघड़ा से टिकट दिया गया है। शनिवार को मुख्यमंत्री ने तेघड़ा विधानसभा क्षेत्र के पकठौल में अपने मित्र के पक्ष में जनसभा को संबोधित किया। लेकिन यहां वीरेंद्र कुमार की हालत काफी दयनीय बतायी जा रही है। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से अपना दावा कर रही थी तथा छह से अधिक दावेदार टिकट लेने की लाइन में थे। लेकिन गठबंधन में सीट जदयू के हिस्से में चली गई तो यहां एनडीए में भारी बवाल मच गया। भाजपा के तमाम नेता और प्रमुख कार्यकर्ताओं ने विद्रोह कर दिया। पूर्व विधायक ललन कुंवर ने लोजपा का दामन थाम लिया और वहां से प्रत्याशी बन गए हैं।अब स्थिति यह है कि ललन कुंवर के समर्थन में भाजपा के दर्जनों नेता खुलेआम प्रचार कर रहे हैं जिससे मुख्यमंत्री के मित्र की हालत बेदम हो गई है। उनका घर पटना है जिसके कारण लोग उन्हें बाहरी कह कर विरोध कर रहे हैं। पिछली बार वह जब जीते थे मगर पांच साल तक फिर कहीं नजर नहीं आए। इस बीच महागठबंधन ने पुराने कम्युनिस्ट और वापपंथ के गढ़ बीहट निवासी रामरतन सिंह को प्रत्याशी बनाया है। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कन्हैया कुमार ने उनके प्रचार की कमान थाम लिया है। कुल मिलाकर तेघड़ा विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। यहां त्रिकोणात्मक संघर्ष में अब तक के समीकरण के अनुसार भाकपा और लोजपा के बीच टक्कर है। हालांकि एनडीए एकजुट हो जाता है तो परिणाम मुख्यमंत्री के मित्र के पक्ष में जा सकता है लेकिन इसकी उम्मीद लगती नहीं है।

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