November 30, 2020

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बिहार चुनाव में उतरे इस बाहुबली ने दी धमकी, जीता तो होगा इलाके का विकास वरना होगा विनाश

पटना:- राजधानी पटना से करीब 120 किलोमीटर दूर भोजपुर का तरारी विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि यहां से बाहुबली नरेंद्र पांडेय उर्फ सुनील पांडेय अपराध की दुनिया से राजनीति में दबंगई दिखाने वाले निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में है।
चार बार के विधायक रहे सुनील पांडेय की उम्र भले ही बढ़ती जा रही हो, लेकिन न तो इसका असर उनकी दंबगई पर पड़ा है और न ही उनके अंदाज-ए-बयां पर है। पिछले विधानसभा चुनाव में भोजपुर की तरारी सीट से सुनील पांडे की पत्नी गीता पांडे ने एलजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। सुनील पांडे तब आरा बम ब्लास्ट केस में जमानत पर बाहर आए थे, लेकिन पत्नी को जीत नहीं दिला पाए। महज 272 वोट से उनकी पत्नी चुनाव हार गईं।

इस बार खुद इस सीट से निर्दलीय ताल ठोक रहे सुनील पांडे साफ साफ कह रहे हैं कि अगर वो जीते तो इलाके का विकास होगा वरना विनाश होगा। भोजपुर जिले की तरारी विधानसभा सीट पर फिलहाल सीआईआई (एमएल) के सुदामा प्रसाद का कब्जा है जबकि बीजेपी ने यहां से कौशल कुमार विद्यार्थी को अपना उम्मीदवार बनाया है, लेकिन सुनील पांडे यहां से अपनी जीत पक्की मान रहे हैं।
2000 में समता पार्टी के टिकट पर पहली बार रोहतास जिले के पीरो से विधायक बने सुनील ने पहली बार नीतीश को मुख्यमंत्री बनाने में भी काफी जोड़तोड़ की थी। सुनील ने राजन तिवारी, मुन्ना शुक्ला, रामा सिंह, अनंत सिंह, धूमल सिंह और सूरजभान जैसे बाहुबलियों को नीतीश के समर्थन में खड़ा कर दिया था। हालांकि नीतीश की सरकार बच नहीं पाई, लेकिन पांडे का नाम बिहार की सियासत में अहम हो गया।

रोहतास जिले के नावाडीह गांव के रहनेवाले सुनील पांडेय के पिता ने उन्हें इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए बैंगलोर भेजा था, लेकिन कॉलेज में हुए एक झगड़े में चाकूबाजी करने के बाद वापस लौट कर गांव आ गए और जल्द ही अपराध की दुनिया का हिस्सा हो गए।

सुनील पांडेय पर लगे आरोप

शहाबुद्दीन के करीबी माफिया सिल्लू मियां की हत्या का आरोप

रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या का आरोप

मुख्तार अंसारी को मारने के लिए 50 लाख की सुपारी देने का आरोप

2015 में आरा के सिविल कोर्ट में हुए धमाके का आरोप

जिनकी आधी जिंदगी जेल में और आधी जिंदगी फरारी में बीती है। उनका एक और परिचय है कि वो पीएचडी हैं। नाम के आगे डॉक्टर लिखते हैं और उनकी पीएचडी भगवान महावीर की अहिंसा पर है, लेकिन ये सब एक दिन में नहीं हुआ है। इस सुनील पांडेय की कहानी पूरी फिल्मी है।

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