December 2, 2020

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केंद्र सरकार की सीनाजोरी नहीं सहेंगे-कांग्रेस

1417 करोड़ रुपये की वसूली के खिलाफ सभी जिलों में आवाज बुलंद

रांची:- झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी जिलों में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्षों, प्रवक्ताओं और मीडिया टीम के सदस्यों द्वारा संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर केंद्र सरकार द्वारा 1417 करोड़ रुपये की वसूली के खिलाफ आवाज बुलंद किया। प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि केंद्र सरकार के इस पक्षपातपूर्ण निर्णय का असर बेरमो और दुमका विधानसभा उपचुनाव पर पड़ेगा और जनता उपचुनाव में भाजपा को सबक सिखायेगी। रांची में प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, धनबाद में विधायक ममता देवी एवं पूर्णिमा नीरज सिंह, चाईबासा में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा एवं राकेश तिवारी, जमशेदपुर में आभा सिन्हा, सिमडेगा में रमा खलखो,गुमला में लाल किशोर नाथ शाहदेव,पलामू में आदित्य विक्रम जायसवाल, हजारीबाग में राजीव रंजन प्रसाद रामगढ़ में डॉ राजेश गुप्ता छोट, हजारीबाग में राजीव रंजन प्रसाद, गिरीडीह में शमशेर आलम,लोहरदग्गा में आलोक कुमार दूबे,लातेहार में चैतू उराँव, खूँटी में सन्नी टोप्पो,सरायकेला में बेलस तिर्की ने संभाला मोर्चा।
प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने इस क्रम में लोहरदगा में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार और केंद्रीय उपक्रमों के पास झारखंड का करीब 75 हजार करोड़ रुपये का बकाया है, लेकिन केंद्र सरकार इस राशि को देने के बजाय संकट की इस घड़ी में झारखंड जैसे पिछड़े राज्यों से ही गलत और अलोकतांत्रिक तरीके से अचानक 1417 करोड़ रुपये आरबीआई के माध्यम से डीवीसी के बकाया राशि के रूप में वसूल लेती है। इतनी बड़ी राशि से कोरोना काल में संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक स्वास्थ्य उपकरण, पीपीई किट और अन्य जांच की व्यवस्था हो सकती थी, लोगों को रोजगार मुहैय्या करायी जा सकता था, अधूरी लटकी विकास परियोजनाओं को गति दी जा सकती थी, लेकिन आदिवासी विरोधी केंद्र सरकार के नकारात्मक और असहयोगात्मक रवैये के कारण झारखंड के समक्ष बड़ी मुश्किल उत्पन हुई है।
प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि सबसे आश्चर्य की बात यह है कि एक ओर केंद्र सरकार खुद कोरोना संकट की बात कह कर गैर भाजपा शासित राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति के बकाया भुगतान देने से इंकार कर रही है, वहीं इस संकट की घड़ी में ही राज्य सरकार के खाते से सीधे राशि निकाल लेने का काम कर रही है। केंद्र सरकार के पास झारखंड सरकार का अभी 2982 करोड़ रुपये जीएसटी कंपनसेशन मद में बकाया है। वहीं 38600 करोड़ रुपये कोल इंडिया और सेल पर खान विभाग का बकाया है। इसके अलावा 33000 करोड़ रुपये कोल कंपनियों पर लगान का बकाया है। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि अन्य राज्यों पर भी बकाया है पर राशि नहीं काटी गयी, जबकि तामिलनाडू, तेलंगाना, कर्नाटक, कश्मीर, आंध्रप्रदेश पर 60 हजार करोड़ से भी ज्यादा बकाया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में झारखंड में 14 में से 12 एनडीए के सांसद चुनाव जीतने में सफल रहे, अभी उनकी बोलती है। भाजपा के तीन-तीन पूर्व मुख्यमंत्री और एक केंद्रीय मंत्री को भी शासन का लंबा अनुभव रहा है, राशि कटौती के मसले पर उनसभी ने भी बोलती बंद हो गयी है। कोरोना काल में प्रदेश भाजपा कार्यालय में साढ़े छः किलो का ताला लगाकर अपने घरों में मक्खन-रोटी खाने वाले और अपने नेताओं को अंगरक्षक मुहैय्या कराने समेत हर छोटी-छोटी बातों पर मुख्यमंत्री को बड़ी-बड़ी चिट्ठी लिखने वाले भाजपा नेताओं को अब इस संबंध में प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखकर झारखंड के हितों की रक्षा की अपील करनी चाहिए।
इधर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने गुमला में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि केंद्र सरकार ने डीवीसी के बकाया के रूप में 1417 करोड़ रुपये काट कर झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य को नीचा दिखाने और राज्य की अर्थव्यवस्था को अस्त-व्यस्त करने का कदम उठाया गया है। इसका जवाब राज्य की जनता दुमका और बेरमो विधानसभा उपचुनाव के माध्यम से देगी। प्रदेश प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि डीवीसी की ओर से जिस 5417.50करोड़ रुपये बकाये की बात की जा रही है, वह सारा बकाया पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार के समय का है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठित सरकार की ओर से अपने कार्यकाल का समय पर डीवीसी का बकाया का भुगतान किया गया है और मात्र 100 से 125 करोड़ का ही बकाया होगा, जिसका भुगतान भी राज्य सरकार की ओर से जल्द ही कर देने का भरोसा कराया गया है। लेकिन पिछले पांच वर्षां में भाजपा सरकार के शासन में डीवीसी का बकाया बढ़ता ही गया, इस बीच रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में 2017 में एक ऐसा द्विपक्षीय समझौता कर लिया गया, जिससे बकाया राशि राज्य सरकार के खाते से सीधे काट लिये जाने का प्रावधान शामिल कर लिया गया। लेकिन पांच सालों में डीवीसी का बकाया राशि बढ़ता ही गया, लेकिन इस दौरान एक बार भी बकाया राशि की कटौती नहीं की गयी, परंतु अब झारखंड में कांग्रेस-जेएमएम-आरजेडी के नेतृत्व में सरकार गठन होने से केंद्र सरकार द्वारा गैर भाजपा शासित राज्यों को परेशान करने तथा आर्थिक स्थिति को कमजोर करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता के प्रवक्ता राजेश गुप्ता छोटू ने रामगढ़ में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि डीवीसी की ओर से जो 5417.50करोड़ रुपये बकाया का दावा किया जा रहा है, उस दावे पर भी राज्य के ऊर्जा विभाग द्वारा आपत्ति दर्ज करायी गयी है और बकाया करीब 3500 करोड़ रुपये का ही होने को लेकर सारे दस्तावेज के साथ विस्तृत जानकारी दी गयी।
राजेश गुप्ता ने बताया कि झारखंड सरकार के पास आय के स्रोत सीमित है। ऐसे में कोविड-19 के आपातकाल में कर संग्रह भी कम हुआ है। पहले से ही राज्य की सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है। दूसरी ओर केन्द्र सरकार द्वारा राज्य के खजाने पर आक्रमण किये जा रहे हैं, वहीं राज्य सरकार का बकाया भी नहीं दिया जा रहा है। राज्य के सभी एनडीए सांसदों से प्रदेश कांग्रेस कमिटी निवेदन करती है कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य की हलात की जानकारी दे एवं सभी प्रकार के बकाया राशि भुगतान करने का अनुरोध करें।

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