November 24, 2020

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एम्बुलेंस के पहिए थमे, कर्मचारी फिर से उतरे हड़ताल पर, मरीजों की सांसें अटकीं

नई दिल्ली:- कोरोनाकाल में राजस्थान में हजारों मरीजों की सांसें फिर से वक्त रहते अस्पताल पहुंचने की चाह में अटक गई हैं। दरअसल राजस्थान में एक बार फिर से 108 और 104 नंबर किस सेवाओं वाले एम्बुलेंसों के पहिए थम गए हैं। राजस्थान एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन ने राज्य सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुये बुधवार को सुबह 6 बजे से हड़ताल कर दी। और मरीजों को अस्पताल जाने के लिए अब निजी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।

कोरोनाकाल में मरीजों को उसके घर या दुर्घटना स्थल से अस्पताल तक लाने और ले जाने वाले इन एम्बुलेंस के ना तो सायरन बज रहे हैं और ना ही इनमे कोई मरीज नजर आ रहा है। दरअसल मरीज को वक्त पर अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने में अहम् भूमिका निभाने वाले 108 और 104 सेवा के एम्बुलेंस कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी है।

चूंकि यह एम्बुलेंस सेवा नि:शुल्क है और 1500 से भी ज्यादा एम्बुलेंस इस सेवा में दिन रात मरीजों को अस्पताल लाने ले जाने का काम कर रही है ऐसे में मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई है। मरीजों और उनके परिजनों को अटकी सांसों के बीच अस्पताल तक लाने और ले जाने के लिये लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। यूनियन का आरोप है कि 108 और 104 एम्बुलेंस संचालन के लिए नया ठेका देने के लिए जो RFP डॉक्यूमेंट जारी किया गया है उसमें समझौते के अनुरूप बदलाव नहीं किया गया है।
104-108 एम्बुलेंस कर्मचारी संघटन के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि हम साल भर से अपनी मांगों को लेकर सरकार और एम्बुलेंस सेवा देने वाली कंपनी के साथ अपनी मनागों को लेकर बातचीत कर रहे हैं हर बार आश्वासन मिलता है। अब एम्बुलेंस की 5 साल की लीज की अवधि ख़त्म हो रही है और नयी कंपनी को इन्हें चलाने की अनुमति टेंडर के अनुसार दी जाएगी।

ऐसे में नए अनुबंध के साथ ही हम अपनी मांगों को भी पूरा करने की मांग का रहे हैं। हां यह सही है इस कोरोनाकाल में हमारी हड़ताल के चलते मरीजों की परेशानियां बढ़ रही हैं जिसके लिए हम हाथ जोड़कर उनसे माफी मांगते हैं, लेकिन समझना होगा की हम भी इन्सान है जो की काफी समय से अपनी मांगों के लिए आवाज उठा रहे हैं।

एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन का कहना है की उसने हर बार आंदोलन में सरकार के आश्वासन से काम चलाया है। लेकिन एम्बुलेंस कर्मचारियों की मांगों को आज तक पूरा नहीं किया गया है। अक्टूबर 2019 से एम्बुलेंस कर्मचारियों को लगातार सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे है। जबकि राजस्थान हाई कोर्ट एम्बुलेंस कर्मचारियों के वेतन में 20 फीसदी बढ़ोतरी के आदेश दे चुका है। इसके अलावा PHS पर भी मनमाने बदलाव करने और एम्बुलेंस कमर्चारियों को बचाव के लिए मास्क और सुरक्षा किट तक नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है। इनकी एक मांग खटारा हो चुकी एम्बुलेंस की समय पर मरम्मत की मांग भी है।

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