November 27, 2020

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हकीकत तो यहीं है: इटखोरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा बदहाल

आक्सीजन के अभाव में कहरता रहा वृद्ध व्यक्ति

चतरा/इटखोरी:- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटखोरी में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से चरमरा गई है। जिससे बच्चों व बुजुर्ग मरीजों के साथ ही दुर्घटनाग्रस्त होकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की जान पर संकट के बादल मंडरा रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण रविवार देर रात देखने को मिला। दरअसल आक्सीजन खत्म हो जाने के कारण उपचार कराने आए वृद्ध व्यक्ति को दिक्कत का सामना करना पड़ा। इटखोरी थाना क्षेत्र के गांधी चौक गांव निवासी 60 वर्षीय गोविन्द यादव को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी उसे ऑक्सीजन की जरूरत थी। मगर उसे ऑक्सीजन नहीं दिया गया। इसे लेकर रविवार की रात मरीज के साथ आए परिजनों ने हंगामा करने लगा। आपकों बता दें कि सरकारी अस्पताल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के उपस्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सकों एवं स्टॉफ के साथ ही सुविधाएं और दवाईयों की बेजा कमी है। जिस कारण ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। गांव की गरीब जनता को बड़ी बीमारी होने पर अपना सब कुछ दाव पर लगाकर ईलाज कराने को मजबुर है। जिसके कारण आज भी गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है और सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के पद खाली पड़े है

सुविधाओं को तरस रहा केन्द्र-

क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र, उपस्वास्थय केन्द्र, सब सेंटरों में स्वास्थय सुविधाओं की कमी है, कई केन्द्रों में मरीजों को दवाईयों उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सूत्रों की माने तो कई बार चिकित्सक जो दवाईयां मरीजों को लिखकर देते है वे भी यहां उपलब्ध नहीं होती ऐसे में चिकित्सक मरीजों को मेड़िकल से दवा खरीदने की हिदायत देते है जिनमें उनका कमिशन जुड़ा हुआ होता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटखोरी में बुनियादी सुविधाओं की कमी है जिसके चलते मरीजों को बाजार से महंगें दामों में इन सुविधाओं को लेना पड़ता है

पीड़ितों को नहीं मिलता ईलाज

सुविधाओं की कमी के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पीड़ितों को सहीं उपचार नहीं मिल पाता जिस वजह से कई पीड़ित की मौत हो जाने की सूचना प्राप्त होती है। वहीं, चिकित्सक भी सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को रेफर करने में भलाई समझते है। पिछले दो सालों में इटखोरी अस्पताल से बड़ी संख्या में मरीजों को हजारीबाग सदर अस्पताल में रेफर किया गया है जिनमें प्रसुति महिलाएं भी शामिल है।

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