November 30, 2020

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उत्तर प्रदेश में सात विधानसभा सीटों पर चुनाव प्रचार तेज, 88 उम्मीदवार मैदान में

लखनऊ:- नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश में सात विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए सभी दलों ने प्रचार तेज कर दिया है। इन सात सीटों पर तीन नवंबर को मतदान होगा जबकि दस नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस उपचुनाव को वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले कुछ दिनों से कई वर्चुअल रैलियों को संबोधित कर चुके है। इस उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा प्रचार के माध्यम से सभी पार्टियों को पीछे छोड़ चुकी है। हालांकि केंद्रीय मंत्रियों या वरिष्ठ भाजपा नेताओं के बिहार चुनाव में व्यस्तता के कारण उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार करने की उम्मीद नहीं है। राज्य भाजपा नेतृत्व मतदाताओं को लुभाने में लगा है। नेता जनता की तब्ज टटोल रहे है। राज्य के मंत्रियों को इन सात विधानसभाओं में प्रचार करने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन सात विधानसभा क्षेत्रों में बूथ स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था, जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह चुनावी सभाओं में भाग ले रहे है। दूसरी ओर, विपक्ष, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी इन सीटों पर प्रचार करने के लिए अपने स्थानीय और राज्य के नेताओं पर भरोसा कर रहे हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा अध्यक्ष मायावती के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने खुद को चुनाव प्रचार से अलग रखा है। अपने निचले स्तर के नेताओं को चुनावी अगुवाई करने का जिम्मा सौंपा है। इस बीच, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक ने दावा किया कि पार्टी के उम्मीदवार सभी सात सीटों पर जीत हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा के चुनाव प्रचार सही समय शुरू किया गया है। पार्टी सभी को साथ लेकर चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पार्टी के उम्मीदवारों को जनता से भारी समर्थन मिलेगा। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने मंगलवार को यहां कहा कि महामारी के दौरान सामाजिक कल्याण, विकास कार्य तथा दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण सरकार ने विपक्ष को बैकफुट पर ला दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के प्रत्याशी उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों के पास कहीं नहीं हैं। राज्य में किये गये लोककल्याण के कार्यो से भाजपा की लोकप्रियता बढ़ी है। हालांकि, विपक्ष के पास कहने के लिए कई अन्य मुद्दे है। कानून-व्यवस्था की समस्या और भ्रष्टाचार का उपचुनाव में असर दिख सकता है। जिसका लाभ विपक्षी दल उठाना चाहेंगे।

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