October 22, 2020

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2017 से पहले वीरान पड़ा कुसुम सरोवर, योगीराज में बना आकर्षण का केन्द्र

मथुरा:- उत्तर प्रदेश सरकार ने मथुरा के गोवर्धन कस्बा स्थित सप्तकोसीय परिक्रमण में पड़ने वाले कुसुम सरोवर का जीर्णोद्धार कराया है। रोशनी से नहाई सरोवर की इमारत लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। कुसुम सरोवर बीते कई सालों से बहदाल अवस्था में था। काशी, अयोध्या के बाद योगीराज में मथुरा का कायाकल्प हो रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण है कि 2017 से पहले वीरान पड़ा कुसुम सरोवर की इमारत रोशनी से नहाई हुई पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। पिछली सरकारों ने आज तक गिरिराज परिक्रमा से जुड़े प्राचीन धार्मिक महत्व के कुंड और सरोवरों का जल आचमन योग्य की पुरजोर कोशिश नहीं की। लेकिन सीएम के निर्देशानुसार पिछले साल ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रस्ताव पर राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) नागपुर की टीम ने काम शुरू कर दिया था, उसमें चार चांद लगाने का कार्य पुरातत्व विभाग और वन विभाग और विकास प्राधिकरण किया है। आज कुसुम सरोवर आधुनिक सौंदर्यीकरण के साथ गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। लॉकडाउट के चलते कार्य में धीमापन जरूर आया लेकिन अब यहां आने वाला श्रद्धालु-पर्यटक यहीं का होकर रह जाता है। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग स्थित कुसुम सरोवर की छतरियों में लाइटिंग हो चुकी है, रात में दर्शकों को आकर्षित करती है।
गोवर्धन परिक्रमा पर राधाकुंड के बाद पड़ता है कुसुम सरोवर, कुसुम सरोवर का मनोरम दृश्य देखते ही बनता है। कुसुम वन कुसुमा सखी का कुंज और रास क्रीड़ा के समय श्रीकृष्ण द्वारा राधाजी की वेणी गूंथी जाने के रूप में प्रसिद्ध है। इतना ही काफी नहीं है, कुसुम सरोवर में एक ऐसी चीज है, जिसे हर कोई पाना चाहता है, लेकिन आज तक प्राप्त नहीं हो सकी है। कुसुम वन क्षेत्र में स्थित कुसुम सरोवर प्राचीन सरोवर है।
कुसुम सरोवर के प्राचीन कच्चे कुंड को ओरछा मध्यप्रदेश के राजा वीर सिंह जू देव ने 1619 में पक्का कराया था। सन 1723 में भरतपुर राजस्थान के महाराजा सूरजमल ने इसे कलात्मक स्वरूप प्रदान किया। महाराज सूरजमल के पुत्र महाराजा जवाहर सिंह ने 1768 में यहां अनेक छतरियां का निर्माण कराकर इसमें चार चांद लगा दिए थे। इसके बाद समय गुजरा, साफ सफाई का आभाव से इसकी दुर्दशा भी देखने के मिली। इसके बाद कई सरकारें आई लेकिन इसके जीर्णोद्धार का बेड़ा किसी ने नहीं उठाया, साढ़े तीन साल पहले प्रदेश में आई भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रज के बारे में सोचा और ब्रज तीर्थ विकास परिषद और विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव पर सौंदर्यीकरण की कार्य योजना तैयार करने काम नागपुर के नीरी संस्थान ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में पिछले साल शुरू हो चुका था। इसके साथ ही गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले अन्य कुण्डों के जल को भी पीने योग्य बनाया गया। जिसके लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने खारे पानी की समस्या से प्रभावित गोवर्धन परिक्रमा मार्ग क्षेत्र के कुंड और सरोवर को नहर के पानी से भरने की योजना बनाई है।
क्षेत्रीय अधिकारी डॉ.अरविंद कुमार ने बताया कि इस कार्य के लिए प्रदेश सरकार ने 47 लाख के प्रस्ताव को पिछले साल स्वीकृत कर दिया था जिसके तहत यह कार्य हुए है।

योगी सरकार और मोदी सरकार की मंशा विश्वस्तरीय पर्यटक स्थल बने गोवर्धन

विश्वस्तरीय पर्यटक स्थल गोवर्धन बनेगा यह इच्छा केन्द्र सरकार के साथ-साथ योगी सरकार ने भी पूर्व में व्यक्त की थी। 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद इस पर कार्य शुरू हुए है। जिसके अवलोकन के लिए 11 जुलाई 2018 को कुसुम सरोवर पहुंचे केन्द्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फास ने कहा था कि केन्द्र व प्रदेश सरकार मिलकर महाराजा सूरजमल के समाधिस्थल, कुसुम सरोवर व उनकी छतरियां की खूबसूरती को और बढ़ाने व पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए तथा कुसुम सरोवर में आधुनिक लाइटें, पानी में बोट, गुलाब बाग, मल्टी पार्किंग व अन्य कार्य शुरू कराने की बात कही थी, जो आज योगीराज में परिपूर्ण होती दिखाई दे रही है। आपको बता दे कि कुसुम सरोवर लाइट व साउंड सिस्टम को करीब आठ करोड़ रूपए से सजाने का कार्य किया गया है।

पारस पत्थर और नागमणि है सरोवर में

तपन गिरि महाराज के अनुसार कुसुम सरोवर में पारस पत्थर और इच्छाधारी नाग की मणि है। मणि को हासिल करने के लिए कई महापुरूष आए, लेकिन कोई सुरक्षित नहीं निकाला। कोई कोढ़ी तो कोई अंधा हो गया। पारस पत्थर को कैसे पा सकते हैं सवाल पर कहा कि अमरनाथ में दो कबूतर हैं, तो क्या उन्हें कोई हासिल कर सकता है। उन्होंने सरोवर का पानी भी पिया। आत्मा सफा है तो सब सफा है जब भी नहाते हैं यहीं पर पानी पीते हैं।

पौराणिक महत्व

कुसुम सरोवर से जुड़ी कई पौराणिक कहानियां हैं। इसमें सबसे अहम है राधा और कृष्ण की कहानी। ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण, राधा जी से छिप-छिप कर कुसुम सरोवर पर ही मिला करते थे। एक समय राधा रानी और सारी सखियां भगवान कृष्ण के लिए फूल चुनने कुसुम सरोवर गोवेर्धन ही जाया करतीं थीं। कुसुम सरोवर गोवर्धन के परिक्रमा मार्ग में स्थित एक रमणीक स्थल है जो अब सरकार के संरक्षण में है।

सरोवर की खासियत

इस सरोवर के चारों तरफ सैंकड़ों सीढ़ियां हैं। इस सरोवर के ईर्द-गिर्द ढेरों कदम के पेड़ हैं और कहा जाता है कि कदम का पेड़ भगवान कृष्ण को बेहद पसंद था और यही वजह है कि सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर से मथुरा-वृंदावन आने वाले पर्यटक कुसुम सरोवर जाना नहीं भूलते। इस सरोवर का पानी तैरने के लिहाज से बेहतर माना जाता है और यहां आने वाले पर्यटक बेहतरीन समय बिता सकते हैं। कुसुम सरोवर के आसपास कई आश्रम और मंदिर भी हैं। साथ ही यहां की शाम की आरती भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

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