October 30, 2020

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मां दुर्गा की उपासना का त्योहार शारदीय नवरात्र शुरू

पटना:- शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की उपासना का त्योहार शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो गया। भारतीय संस्‍कृति में देवी को ऊर्जा का स्रोत माना गया है। अपने अंदर की ऊर्जा को जागृत करना ही देवी उपासना का मुख्‍य प्रयोजन है। नवरात्रि मानसिक, शारीरिक और अध्‍यात्‍मिक शक्ति का प्रतीक है। इसलिए हजारों वर्षों से लोग नवरात्रि मना रहे हैं। 17 अक्टूबर से शुरू होकर नवरात्र 25 अक्टूबर तक चलेगा। इन नौ दिनों में मां भगवती की भक्तिपूर्वक आराधना की जायेगी। नवरात्र के पहले दिन ही मां शैलपुत्री की आराधना में पटना आसपास के इलाके के लोग सुबह से ही भक्ति में लीन रहे। मंदिरों तथा घरों में कलश स्थापना के साथ देवी दुर्गा की आराधना शुरू हो गई है। बिहार में कोरोना संक्रमण की रोकथाम और विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस बार दुर्गापूजा पर न तो पंडाल बनाए जा रहे हैं और न ही मेले का आयोजन किया जाएगा। गृह विभाग की ओर से एक आदेश भी जारी किया गया है। कोरोना महामारी को लेकर जिला प्रशासन की मनाही के कारण दुर्गापूजा समितियां इस बार बदले रूप में पूजा कर रही है। प्रमुख पूजा समितियों ने छोटे मंडप बनाकर कलश स्थापित करने की तैयारी की है। सरकार के आदेश के मुताबिक, इस बार पूजा के लिए बड़े पूजा पंडाल और मूर्तियां स्थापित करने की मनाही है। बड़ी पटन देवी मंदिर के पुजारी आचार्य विजय शंकर गिरी ने बताया कि मंदिर में किसी प्रकार का कोई पंडाल नहीं बनाया गया और नहीं अलग से कोई मूर्ति स्थापित की गई है। पहले से स्थापित मां की प्रतिमा की पूजा कलश स्थापना के साथ आरंभ हो जाएगी। मंदिरों की रंगाई-पुताई के साथ फूल और रंगीन बल्बों से सजाया गया है। कलश स्थापना के साथ मंदिरों में मां की आराधना आरंभ की गयी है।
आज से नौ दिनों तक माता के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।अपने पहले स्वरूप में मां ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। इनकी पूजा से चंद्रमा से संबंधित दोष समाप्त होते हैं। नवरात्र पर्व के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। उन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं। मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्र में तीसरे दिन इनकी पूजा होती है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है, जिससे इनका यह नाम पड़ा। इस देवी की पूजा से शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव दूर होते हैं। नवरात्र पूजन के चौथे दिन देवी के कूष्मांडा के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। मान्यता है कि उन्होंने अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न किया था। उनकी आठ भुजाएं हैं। मां कूष्मांडा की पूजा से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है। नवरात्र का पांचवां दिन स्कंदमाता की पूजा का होता है। माना जाता है कि उनकी कृपा से मूर्ख भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से जाना जाता है। ये बुध ग्रह के बुरे प्रभाव को कम करती हैं। मां दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। इनकी उपासना से भक्तों को आसानी से धन, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महर्षि कात्यायन ने पुत्री प्राप्ति की इच्छा से मां भगवती की कठिन तपस्या की तब देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया, जिससे उनका यह नाम पड़ा। दुर्गापूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। कालरात्रि की पूजा करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुल जाते हैं और सभी असुरी शक्तियों का नाश होता है। देवी के नाम से ही पता चलता है कि इनका रूप भयानक है। मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। उनकी आयु आठ साल की मानी गई है। उनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद होने की वजह से उन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा गया है। इस देवी की पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं। नवरात्र पूजन के नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वालों को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री की कृपा से ये सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं। मां सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं।

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