October 30, 2020

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ताइवान के विदेश मंत्री का साक्षात्कार दिखाने पर बौखलाया चीन, भारतीय मीडिया को लेकर दिया ऐसा बयान

नई दिल्ली:- ताइवान के विदेश मंत्री का इंटरव्यू दिखने के बाद से चीन बौखलाया हुआ है। ड्रेगन ने भारतीय मीडिया को अपनी हेकड़ी दिखाने की कोशिश करते हुए कहा है कि वह एक चीन सिद्धांत का सम्मान करें और ताइवान की स्वतंत्रता की बात करने वाली ताकतों को अपना मंच प्रदान नहीं करें। भारत पहले ही चीन को यह साफ कर चुका है कि भारत में पत्रकारिता पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।
चीन ने शुक्रवार को भारतीय मीडिया को ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू द्वारा दिए गए एक साक्षात्कार में ताइवान की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाए जाने पर नाराजगी जताई है। भारत में चीन के दूतावास ने कहा है कि यह भारत सरकार की लंबे समय से चली आ रही एक चीन नीति के समर्थन के खिलाफ है। भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रॉन्ग ने एक वक्तव्य जारी कर कहा है कि कुछ भारतीय टीवी चैनलों ने ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू का साक्षात्कार दिखाया है। यह एक चीन नीति के खिलाफ है और भारत की लम्बे समय से चली आ रही एक चीन नीति के उलट है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल एक ही चीन है और ‘पीपल रिपब्लिक ऑफ चाइना’ पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करती है। ताइवान चीन का अटूट हिस्सा है। यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का इस पर एकमत है। उन्होंने कहा कि ताइवान की ‘डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी’ और पृथकतावदी ताकतें इसे बदलने का प्रयास कर रही हैं और ताइवान की स्वतंत्रता की बात कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक और कानूनी तथ्य को नहीं नकारा जा सकता कि ताइवान चीन का अटूट अंग है। चीन के साथ राजनीतिक संबंध रखने वाले सभी देशों को इस प्रतिबद्धता का सम्मान करना चाहिए और भारत सरकार की भी यही नीति रही है। एक तरफ चीन अपनी एक चीन नीति का समर्थन करता है तो अन्य देशों की क्षेत्रीय अखंडता को लगातार कमजोर करने की कोशिश में लगा रहता है। चीन की ओर से हाल ही में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को विवादित क्षेत्र बताया गया था। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने चीन को करारा जवाब देते हुए कहा था कि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश दोनों भारत के अभिन्न और अटूट अंग हैं। साथ ही उन्होंने चीन को सलाह दी थी कि वह जिस तरह अपनी क्षेत्रीय अखंडता की बात करता है, उसी तरह उसे अन्य देशों की क्षेत्रीय अखंडता का भी सम्मान करना चाहिए।उल्लेखनीय है कि इससे पहले चीन ने 10 अक्टूबर को ताइवान दिवस की भारतीय मीडिया में कवरेज पर भी आपत्ति जताते हुए भारतीय मीडिया को परामर्श जारी किया था। इसके उत्तर में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चीन को स्पष्ट किया था कि भारत में मीडिया पूरी तरह से स्वतंत्र है।

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