October 24, 2020

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डीवीसी बकाए में झारखंड को बड़ा झटका, केंद्र ने आरबीआइ खाते से वसूले 1417.50 करोड़

रांची:- केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के बिजली बकाए भुगतान के मामले में झारखंड को जोर का झटका दिया है। पूर्व में दिए गए अल्टीमेटम की मियाद खत्म होने के बाद मंत्रालय ने झारखंड के रिजर्व बैंक आफ इंडिया के खाते से 1417.50 करोड़ वसूलने का आदेश दिया है। यह बकाए की पहली किस्त है और बकाए की पूरी राशि 5608.32 करोड़ रुपये है।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संजीव नंदन सहाय ने इस बाबत जारी आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव अविनाश कुमार, योजना सह वित्त विभाग की सचिव हिमानी पांडेय और दामोदर घाटी निगम के चेयरमैन (प्रभारी) गुरदीप सिंह को भी प्रेषित की है। पत्र में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और डीवीसी के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते का हवाला दिया गया है।

गौरतलब है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने बीते 11 सितंबर को ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव को प्रेषित पत्र में डीवीसी के 5608.32 करोड़ रुपये के बकाए भुगतान को लेकर नोटिस जारी किया था। इसमें 15 दिन के भीतर बकाए का भुगतान करने की चेतावनी दी गई थी। पत्र में उल्लेख किया गया था कि मियाद समाप्त होने के बाद त्रिपक्षीय समझौते के तहत केंद्र सरकार राज्य सरकार के आरबीआइ खाते से चार समान किस्तों में वसूली करेगी।

संघीय ढांचे पर केंद्र का प्रहार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सरकार के खाते से पैसे वसूले जाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह संघीय ढांचे पर प्रहार है। केंद्र सरकार का यह कृत्य निराशाजनक है और वे इसकी कड़ी आलोचना करते हैं। केंद्र सरकार वित्तीय दंड लागू कर रही है। यह केंद्र सरकार की राज्य के खिलाफ साजिश है कि वह आर्थिक मंदी के इस दौर में राज्य को वित्तीय मोर्चे पर अस्थिर करना चाहती है। 2017 में हुआ त्रिपक्षीय समझौता पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के शासनकाल में हुआ था। इस फैसले ने संघीय ढांचे को बर्बाद करने की आधारशिला डाली है। केंद्र सरकार एक ओर जीएसटी मुआवजे की राशि नहीं दे रही है तो दूसरी तरफ खुद करोड़ों रुपये की कटौती कर महामारी के वक्त में वित्तीय चोट पहुंचा रही है। यह राज्य की आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव डालेगा।

ऊर्जा विभाग ने कहा, गलत कार्रवाई

ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव अ‌विनाश कुमार ने राशि वसूलने की कार्रवाई पर कहा कि यह उचित नहीं है। यह पुराना बकाया है। कोविड-19 के दौर में राज्य आर्थिक मंदी की दौर से गुजरते हुए उससे जूझ रहा है। राज्य सरकार ने इस बाबत केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से अनुरोध किया था। डीवीसी के साथ बकाए को लेकर विवाद भी है। इसपर निर्णय किए बगैर राशि की वसूली ठीक नहीं है।

लंबे अरसे से चला आ रहा था बकाया

झारखंड बिजली वितरण निगम लंबे अरसे से डीवीसी का बिजली आपूर्ति मद में बकाए के भुगतान में विफल रहा है। यही वजह है कि बकाया बढ़कर 5608.32 करोड़ हो चुका है। डीवीसी का बिजली क्रय को लेकर समझौता 31 मार्च 2015 और 23 अगस्त 2017 को हुआ था। 27 अप्रैल 2017 को भुगतान की जाने वाली राशि की सुरक्षा के मद्देनजर त्रिपक्षीय समझौते में यह तय हुआ था कि भुगतान में देरी होने की स्थिति में आरबीआइ खाते से पैसा लिया जा सकेगा। भुगतान बिल प्रस्तुत करने के 60 दिनों के भीतर करना होगा। बकाए भुगतान के लिए डीवीसी ने 13 अगस्त को बिल जारी किया था।

विपरीत असर पड़ेगा आर्थिक स्थिति पर

डीवीसी के बकाए की वसूली के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के खाते से कटौती का निर्णय केंद्र व राज्य के आपसी टकराव का नतीजा बताया जा रहा है। कोरोना संकट के दौर में समेकित निधि (कांसुलेटेड फंड) से राशि की कटौती राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका है। समेकित निधि खाते में कर राजस्व, गैर कर राजस्व, केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी और केंद्रीय अनुदान की राशि होती है। इस राशि का उपयोग राज्य विकास योजनाओं में करते हैं। मौजूदा समय में यदि इस राशि में कटौती होती है तो इसका सीधा असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। कोरोना के दौर में राज्य सरकार के तमाम आर्थिक स्रोत थमे हुए हैं, ऐसे में यह कटौती भारी पड़ेगी।

अब आगे क्या होगा

केंद्र सरकार ने पहली किस्त की कटौती करने के बाद कहा है कि नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद यह निर्णय किया गया है। सरकार को आत्मनिर्भर भारत के तहत ऋण लेकर डीवीसी का भुगतान करने का सुझाव दिया गया था। बकाया चार समान किस्तों में कटेगी। इसके मुताबिक अगला किस्त अगले वर्ष जनवरी, अप्रैल और जुलाई में वसूला जाएगा।

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