October 30, 2020

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तेजस्वी ने शपथ-पत्र में दी झूठी जानकारी, छुपाया संपत्ति का ब्योरा : सुशील कुमार मोदी

पटना:- बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने आज आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने अपने नामांकन पत्र के साथ दिए गए शपथ-पत्र में कई गलत और झूठी जानकारी देकर संपत्ति का ब्योरा छुपाया है, जिसे चुनाव आयोग के संज्ञान में लाया जाएगा। श्री मोदी ने गुरुवार को यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्री यादव ने राघोपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए दाखिल नामांकन पत्र में झूठी और गलत जानकारी देकर संपत्ति का ब्योरा छुपाया है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और भाजपा इसे चुनाव आयोग के संज्ञान में लाएगी। भाजपा नेता ने सवालिया लहजे में कहा कि श्री यादव की आमदनी अठन्नी की है लेकिन उन्होंने चार करोड़ 10 लाख रुपये का ऋण दिया है, जो उनके शपथ पत्र में दर्शाया गया है। उन्होंने चार करोड़ 10 लाख रुपये का ऋण किस कंपनी को दिया है और इतनी बड़ी राशि देने के लिए पैसे कहां से आये। उन्होंने कहा कि बिहार के बेरोजगार युवक उनके इस गणित को जानना चाहते हैं कि आखिर किस तरह से यह किया गया। श्री मोदी ने कहा कि श्री यादव ने वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव के समय में दाखिल किए गए शपथ पत्र में दिखाया है कि उन्होंने एक करोड़ सात लाख रुपये का ऋण किसी भारतीय कंपनी को दिया है। किस कंपनी को यह ऋण दिया गया था उसे प्रदेश की जनता जानना चाहती है। उन्होंने कहा कि आखिर बगैर किसी नौकरी या व्यवसाय के उन्हें पांच वर्ष में तीन करोड़ रुपए आमदनी कैसे हुई कि उन्होंने चार करोड़ 10 लाख रुपए का ऋण दे दिया। उप मुख्यमंत्री ने दस्तावेजी प्रमाण देते हुए कहा कि 06 मई 2005 को राजद के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुनाथ झा और श्रीमती कांति सिंह पार्टी के टिकट के साथ-साथ मंत्री पद के बदले गिफ्ट में ली गई संपत्ति को खरीदी गई संपत्ति बता रहे हैं। श्री झा ने वर्ष 2005 में गोपालगंज जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट अपने दो मंजिला मकान श्री यादव और उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव को महज 15 वर्ष की आयु में गिफ्ट कर दिया। इसी तरह से श्रीमती सिंह ने भी वर्ष 2005 में पटना के चितकोहरा के निकट तीन मंजिला मकान गिफ्ट कर दिया था। श्री मोदी ने कहा कि श्री यादव ने अपने शपथ पत्र में गोपालगंज के दो मंजिला मकान के केवल ग्राउंड फ्लोर को ही दिखाया है। जो संपत्ति गिफ्ट में मिली है उसे वर्ष 2005 में खरीदी हुई दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सवाल यह उठता है कि आखिर 31 वर्ष की उम्र में श्री यादव 52 तथा उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव 28 से अधिक संपत्ति के मालिक कैसे बन गए। श्री यादव के पास न तो कोई पुश्तैनी संपत्ति थी और न ही कोई नौकरी तथा व्यवसाय ही था। वह क्रिकेट में जहां वह विफल रहे वहीं मुश्किल से नवमी तक की पढ़ाई कर पाए। आखिर क्या योग्यता थी जिसके बल पर करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन गए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री यादव की कई संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग ने जब्त की है, जिसमें डीलाइट मार्केटिंग की 27.75 डिसमिल जमीन, एके इंफोसिस, एबी एक्सपोर्ट्स और फेयर ग्लो का गेस्ट हाउस शामिल है। श्री यादव भारतीय रेल खान-पान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) घोटाले में आरोपित हैं और लॉकडाउन के कारण ट्रायल शुरू नहीं हो सका है। इस मामले में उनके पिता और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की तरह उनका भी जेल जाना तय है।

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