October 20, 2020

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बिहार में सरकार बनी तो भूमि-कृषि सुधार, औद्योगिक विकास और बंद चीनी मिलें होंगी चालू : माले

पटना:- बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नीत महागठबंधन के घटक भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) ने कहा कि यदि राज्य में उनके गठबंधन की सरकार बनी तो भूमि और कृषि सुधार के साथ ही प्रदेश में औद्योगिक विकास होगा तथा बंद बड़ी सरकारी चीनी मिलें फिर से चालू की जाएगी। भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने गुरुवार को यहां पार्टी का चुनावी घोषणा-पत्र जारी करने के बाद कहा कि राज्य में पार्टी के सहयोग से यदि महागठबंधन की सरकार बनी तो डी. बंदोपाध्याय आयोग की अनुशंसाओं के आलोक में सीलिंग की जमीन घटाना, कानून का सख्ती से पालन, भूदान समितियों की पुनर्स्थापना, बटाईदारों का पंजीकरण, किसानी का हक, बिना आवास वाले परिवार को 10 डिसमिल आवासीय जमीन, कृषि में सरकारी निवेश पर जोर, सस्ते ऋण, नए कृषि विश्विद्यालय, हर पंचायत में खरीद केंद्र की गारंटी बन्द पड़े मिलों एवं सरकारी इलाके की बीमार इकाइयों को फिर से शुरू किया जाएगा। श्री भट्टाचार्य ने घोषणा-पत्र के हवाले से बताया कि रोजगारोन्मुख औद्योगिक विकास पर जोर दिया गया और कहा गया है कि अन्य छोटे-मध्यम उद्योगों का विकास, बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान, सभी रिक्त पड़े सरकारी पदों पर अविलंब बहाली, महात्म गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) में प्रति परिवार की बजाए प्रति व्यक्ति 200 दिन काम और न्यूनतम मजदूरी की गारंटी, शहरी रोजगार गारंटी कानून पारित कर उसके तहत 300 दिन का काम और न्यूनतम जीवनयापन लायक मजदूरी की गारंटी होगी। माले के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि बिहार में पलायन और शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाई जाएगी। सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा की व्यवस्था, सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) लागू करना, आशा कार्यकर्ताओं को सम्मान और वेतनमान तय होगा, स्किम वर्करों को सम्मान, शिक्षकों सहित सभी को सरकारी कर्मचारी का दर्जा और समान काम के लिए समान वेतन का प्रावधान किया जाएगा। श्री भट्टाचार्य ने कहा कि नीतीश सरकार अब भी विकास और सुशासन का दावा करते नहीं अघाती लेकिन लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों से इनका कोई लेना-देना नहीं रह गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अच्छे दिन’ के नारे की तरह ये बातें क्रूर मजाक साबित हुई हैं। वर्ष 2015 के विधनसभा चुनाव में जनता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ स्पष्ट जनादेश दिया था लेकिन भाजपा के किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करने के लालच और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेशर्म राजनीतिक अवसरवाद ने इस जनादेश को मजाक बना दिया। माले के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि बिहार की जनता और जनादेश का यह अभूतपूर्व अपमान था। भाजपा की सत्ता हड़पने की भूख ने अब उनके अपने गठबंधन में ही सेंध लगा दी है और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) राजग गठबंधन से अलग हो गई है। साथ ही भाजपा के कई नेता लोजपा का टिकट लेकर जदयू के खिलापफ चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता के केंद्रीकरण के साथ ही चरम अहंकार और जनता एवं लोकतंत्र पर हमले लगातार तेज हो रहे हैं। इस बार का चुनाव डबल इंजन के नाम पर बिहार को रौंद रही ‘डबल बुलडोजर’ की इस सरकार को सत्ता से बेदखल करने का निर्णायक अवसर है। श्री भट्टाचार्य ने कहा कि लाॅकडाउन के समय भाजपा और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता-कार्यकर्ता गायब हो गए थे लेकिन आज चुनाव में प्रचार कर रहे हैं कि वे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए चिंतित थे। उन्होंने कहा कि इससे हास्यास्पद और क्या होगा। पलायन की हकीकत आज सबके सामने है।

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