October 22, 2020

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प्रथम चरण में पांच सीट पर निवर्तमान विधायकों के रिश्तेदार लड़ेंगे चुनाव

पटना:- बिहार विधानसभा के लिए 28 अक्टूबर को प्रथम चरण की 71 सीटों पर होने वाले चुनाव में कहलगांव, अमरपुर, संदेश, अतरी और वजीरगंज पांच सीटें ऐसी हैं, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और महागठबंधन ने अपने निवर्तमान विधायकों को बेटिकट कर उनके रिश्तेदारों को उम्मीदवार बनाया है। भागलपुर जिले के कहलगांव विधानसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इससे पूर्व वर्ष 2015 के चुनाव में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) उम्मीदवार नीरज कुमार मंडल को 21229 मतों के अंतर से पराजित किया था। कहलगांव को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। श्री सिंह कहलगांव से नौ बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। इस बार कांग्रेस ने उनके पुत्र शुभानंद मुकेश को उम्मीदवार बनाया है, जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी की टक्कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार पवन कुमार यादव के साथ मानी जा रही है। बांका जिले के अमरपुर सीट से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने निवर्तमान विधायक जर्नादन मांझी की जगह उनके पुत्र जयंत राज को टिकट दिया गया है, जो पहली बार चुनावी रणभूमि में किस्मत आजमायेंगे। वहीं, महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के टिकट पर जीतेन्द्र सिंह उम्मीदवार बनाये गये हैं। श्री सिंह भी पहली बार चुनावी संग्राम में उतरे हैं। वर्ष 2015 में श्री जनार्दन मांझी ने भाजपा उम्मीदवार मृणाल शेखर को 11773 मतों के अंतर से पराजित किया था। भाजपा से टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर मृणाल शेखर ने इस बार लोजपा का दामन थाम लिया और इस सीट पर लोजपा के उम्मीदवार भी बनाये गये हैं। हालांकि राजग उम्मीदवार के विरुद्ध चुनाव लड़ने के आरोप में श्री शेखर को भाजपा ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है।
भोजपुर जिले के संदेश सीट से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में फरार निवर्तमान विधायक अरुण यादव की जगह इस बार उनकी पत्नी किरण देवी को उम्मीदवार बनाया है, जो पहली बार चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, जदयू ने पूर्व विधायक विजेन्द्र यादव को टिकट दिया है। दिलचस्प है कि श्री विजेंद्र यादव राजद विधायक अरुण यादव के बड़े भाई हैं यानी कि इस सीट पर मुकाबला घर के अंदर ही है। पिछले चुनाव में श्री अरुण यादव ने भाजपा प्रत्याशी संजय सिंह टाइगर को 25427 मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। इस सीट से लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं श्वेता सिंह को भाजपा ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
गया जिले के अतरी विधानसभा सीट पर वर्ष 2015 में राजद के टिकट पर कुंती देवी निर्वाचित हुयी थी। इस बार के चुनाव में राजद ने कुंती देवी के पुत्र रंजीत कुमार यादव को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है, जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर जदयू की टिकट पर मनोरमा देवी चुनाव लड़ रही हैं। दोनों महिला प्रत्याशी के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। वर्ष 2015 में श्रीमती कुंती देवी ने लोजपा उम्मीदवार अरविंद कुमार सिंह को 13817 मतों के अंतर से परास्त किया था।
गया जिले के वजीरगंज सीट से कांग्रेस के टिकट पर अवधेश सिंह ने पिछले चुनाव में जीत हासिल की थी। इस बार के चुनाव में कांग्रेस ने श्री अवधेश सिंह के पुत्र डाॅ. शशि शेखर सिंह को पार्टी का प्रत्याशी बनाया है, जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, भाजपा के टिकट पर पूर्व विधायक वीरेन्द कुमार सिंह उन्हें चुनौती दे रहे हैं। पिछले चुनाव में श्री अवधेश सिंह ने भाजपा के वीरेन्द्र सिंह को 12759 मतों के अंतर से पराजित किया था।
गौरतलब है कि इस बार के विधनसभा चुनाव में राजग के घटक दलों में भाजपा, जदयू, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल है। वहीं, महागबंधन में राजद, कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवाद (भाकपा-माले), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार मिलकर चुनाव लड़ेंगे।

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