October 24, 2020

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कोरोना काल में मीडिया ने लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई : डॉ. चौधरी

दरभंगा:- वरिष्ठ सामाजिक चिंतक एवं पूर्व विधान पार्षद डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने कोरोना से जंग में मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए मंगलवार को कहा कि कोविड-19 जैसी असामान्य परिस्थितियों में पत्रकारों ने अहम भूमिका निभाई है। डॉ. चौधरी ने ख्यातिलब्ध पत्रकार रामगोविन्द प्रसाद गुप्ता की 85वीं जयंती के अवसर पर यहां आयोजित ‘असमान्य परिस्थितियों में जनचेतना एवं पत्रकारों की भूमिका’ विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले छह माह से अधिक समय से भारत समेत पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। कोरोना संक्रमण जैसी असमान्य परिस्थितियों में पत्रकारों ने अहम भूमिका निभाई है और उसी का परिणाम है कि आज हर कोई कोरोना से सावधान है। हालांकि कई बार ऐसी असामान्य परिस्थिति भी नजर आ जाती है, जिसमें मीडिया जनचेतना जगाने की जगह वकील और जज बनी हुई नजर आती है। सामाजिक चिंतक ने कहा कि मीडिया को अपनी विश्वसनीयता बरकरार रखने के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन सर्वश्रेष्ठ ढंग से करना होगा। पत्रकारों को समाज में सद्भावना और प्रेम बनाये रखने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में मीडिया पर बाजारवाद पूरी तरह हावी है, जिस कारण पत्रकारों के समक्ष विविध प्रकार की मजबूरियां भी उपस्थित हैं। श्री चौधरी ने कहा कि बदली हुई परिस्थितियों में मीडिया ने भी मध्यम मार्ग चुन लिया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक दूरी से समाज में विद्वेष फैलता है और आज इसी कारण से समाज एवं परिवार टूटने के कगार पर पहुंच गया है। वैश्विक महामारी में लोग खुद में सिमट कर रह गये हैं। उसने वृद्ध माता-पिता एवं संबंधियों तक को भुला दिया है।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ राजनीतिक चिंतक डॉ. जितेन्द्र नारायण ने कहा कि देश में आजादी पूर्व से ही पत्रकारिता जनचेतना को जगाती रही है तथा जनमत निर्माण में भी इसका अहम योगदान रहा है। पर उस समय की सरोकार रूपी पत्रकारिता वर्तमान दौर में स्वार्थ से प्रभावित हो चुकी है। इसके कारण पत्रकार भी आरोप-प्रत्यारोप के खेल में शामिल होकर वास्तविकता को संदेहप्रद बना देते है। यह प्रवृति समाज के लिए घातक है क्योंकि समाजिक चेतना जगाने का अंतिम दायित्व पत्रकारों का है और इसमें गिरावट से समाज-राष्ट्र सीधे तौर पर प्रभावित होता है। पत्रकारों का धर्म तटस्थ रहकर समस्या के निदान के प्रति समाज को जागृत करना ही है। इससे पूर्व विषय प्रवेश कराते हुए साहित्यकार डॉ. सतीश कुमार सिंह ने कहा कि पत्रकारों की अभिव्यक्ति असल में आमलोगों की अभिव्यक्ति होती है। इसलिए असमान्य परिस्थितियों में पत्रकारों की जवाबदेही बढ़ जाती है। पत्रकारिता का धर्म कहता है कि बिना किसी खास विचारधारा से प्रभावित हुए आमलोगों की भावनाओं और वास्तविकता को उजागर करना ही पत्रकारिता है। संक्रमण के दौर में पत्रकारों ने अपनी भूमिका का सटीक निर्वहन किया है। डॉ. अमरनाथ कुंवर ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि जनचेतना निर्धारण में पत्रकारिता की अहम भूमिका रही है। अभी कोरोना महामारी जैसी असमान्य परिस्थितियों में पत्रकारों ने जैसा कार्य किया है वैसा ही कार्य पत्रकारों को सामाजिक समस्याओं के असमान्य होने पर भी करना चाहिए। पूर्व महापौर प्रबोध कुमार सिन्हा ने कहा कि असामान्य परिस्थितियों के दोषियों को पत्रकार चिन्ह्ति करें और उनका स्याह चेहरा जनमानस के समक्ष उजागर करें तभी पत्रकारिता की विश्वसनीयता बचेगी। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कृष्ण कुमार झा ने कहा कि विपरित परिस्थितियों में ही व्यक्ति की पहचान होती है। असामान्य परिस्थिति में जनचेतना को सही दिशा देने की जिम्मेवारी जब पत्रकारों पर आती है तभी उनका निखरा स्वरूप भी समक्ष आता है। कार्यक्रम का प्रारंभ स्व. रामगोविंद प्रसाद गुप्ता की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर अतिथियों ने किया। डॉ. एडीएन सिंह के ओजस्वी संचालन में अतिथियों का स्वागत प्रदीप गुप्ता ने किया। जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रमोद कुमार गुप्ता ने दिया।

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