October 25, 2020

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हाथरस पीड़िता के परिजनो के बयान दर्ज,अगली सुनवाई दो नवम्बर को

लखनऊ:- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में सोमवार को हाथरस में हैवानियत की शिकार पीड़िता के परिजनो के साथ पुलिस महानिदेशक समेत अन्य अधिकारियों के बयान रिकार्ड किये गये।
समाज को शर्मसार करने वाली घटना के बारे में राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश किया गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो नवम्बर को नियत की है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई पर अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था और विशेष सचिव स्तर का अधिकारी अदालत में उपस्थित होंगे।
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल व न्यायमूर्ति राजन राय की पीठ ने स्वतः संज्ञान वाली याचिका पर दिए है ।
सूत्रों के अनुसार पीड़िता के परिवार ने घटना के बारे में अदालत को विस्तार से बताया और साथ ही जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने पीड़िता के शव को उनकी मर्जी के बिना जला दिया और उसका अंतिम संस्कार भी विधिवत नहीं करने दिया। जिला प्रशासन ने उन पर अनुचित दवाब डालने की कोशिश की।
इससे पहले पीड़िता के परिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह करीब साढ़े दस बजे लखनऊ लाया गया। दो बजे अदालत की सुनवाई शुरू होने से पहले परिवार को उत्तराखंड अतिथिगृह में ठहराया गया और उनके भोजन का इंतजाम किया गया।
गौरतलब है कि इस मामले में एक अक्टूबर को उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सम्बधित दस्तावेजो सहित आला अधिकारियों को 12 अक्टूबर को पेश होने के आदेश दिए थे। पूर्व आदेश के पालन में अधिकारी व पीड़िता के परिवारीजन अदालत में उपस्थित हुए।
इस मामले में एक अक्टूबर को अदालत ने प्रदेश सरकार के शीर्ष अधिकारियों और हाथरस के जिलाधिकारी औश्र पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया था। न्यायालय ने पीड़िता के साथ हाथरस पुलिस के कथित बर्बर, क्रूर और अमानवीय व्यवहार पर राज्य सरकार से भी प्रतिक्रिया मांगी थी। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने गत 1 अक्टूबर को इस मुद्दे का स्वत: संज्ञान लेते हुए आदेश जारी किए थे ।
अदालत ने हाथरस की घटना पर बहुत सख्त निर्देश देते हुए हाथरस पुलिस और प्रशासन के कृत्य पर गंभीर चिंता भी व्यक्त की थी और इस घटना पर राज्य सरकार से भी प्रतिक्रिया मांगी थी।इसके साथ ही प्रमुख सचिव गृह,डीजीपी, एडीजी कानून और व्यवस्था, हाथरस डीएम और एसपी को नोटिस जारी कर उन्हें अगली सुनवाई पर तलब किया गया था ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हाथरस दुष्कर्म मामले में सचिव गृह भगवान स्वरूप की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय एसआइटी जांच कर रही है। एसआइटी में महिला अधिकारी एसपी पूनम भी शामिल हैं। हाथरस की घटना को लेकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री से बातचीत कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की बात भी कही थी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस को पत्र भेजकर इस समूचे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गयी थी । पत्र में विशेष जांच एजेंसी को जांच ट्रांसफर करने की भी मांग की गयी है। अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर को पत्र भेजकर उनसे प्रार्थना की थी कि वह 14 सितंबर को हुए इस दुष्कर्म मामले का स्वत: संज्ञान लेकर युक्ति-युक्त निर्देश जारी करें।
पत्र में अधिवक्ता ने लिखा था कि चार लोगों ने दुष्कर्म के बाद गला दबाकर मारने की कोशिश की थी । प्रदेश में कानून का शासन है, जनता के मन में ऐसा विश्वास पैदा करने के लिए आवश्यक है। माँग की गई थी कि इस दुष्कर्म मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, ताकि समूचे घटना की सही जांच संभव हो सके । इस मामले में योगी सरकार ने सी बी आई जांच की शिफारिश भेजी थी । इसके बाद सी बी आई ने जाँच टेकओवर भी कर ली है ।

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