October 31, 2020

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सीओ2 उत्‍सर्जन में 160,000 टन से ज्‍यादा की कमी

नयी दिल्ली:- एप्सन ने हाई कैपिसिटी के इंक टैंक इंकजेट प्रिंटर्स को (जिसे मार्केट में अब इको टैंक के नाम से जाना जाता है) अक्टूबर में इंडोनेशिया में लॉन्च किया गया। इसके बाद प्रिंटर की बिक्री के क्षेत्र का विस्तार किया तथा वर्ष 2019 तक एप्सन 170 देशों और क्षेत्रों में प्रिंटर की बिक्री करने लगा। इसके नतीजे के तौर पर हमारे हाई कैपिसटी इंक टैंक इंक जेट प्रिंटर्स की बिक्री ग्लोबल मार्केट में धीरे-धीरे बढ़ने लगी। हाल ही में तीन सितंबर तक भारत में हमारे हाई कैपिसटी इंक टैंक इंक जेट प्रिंटर्स की बिक्री ने 43 लाख का आंकड़ा छू लिया। इसके अलावा हमारा अनुमान है कि प्रिंटर में प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने से, जो इंक कार्टिज का प्रमुख घटक है, में करीब एक लाख 66 हजार टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन कम हुआ। अगर यह सभी यूनिट्स काट्रिज प्रिंटर होंती तो इससे ज्यादा उत्सर्जन होता। कंपनी ने पहले प्रगतिशील देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद कंपनी ने विकसित देशों में अपनी राह तलाशी। एप्सन ने हर वर्ष इंकजेट के मार्केट में अपने हाई कैपिसिटी के इंक टैंक इंकजेट प्रिंटर्स के मॉडलों की बिक्री की दर में काफी बढ़ोतरी की है। इसके नतीजे के तौर पर एप्सन, जो ब्रैंड की मजबूत पहचान का दावा करता है और जिसके पास अपने प्रॉडक्ट्स का काफी विस्तृत पोर्टफोलियो है, ने लगातार 10 वर्षों तक ग्लोबल हाई कैपिसटी इंक जेट प्रिंटर के मार्केट में अपनी शीर्ष हिस्‍सेदारी बरकरार रखी। वित्तीय वर्ष 2019-203 में इंकजेट प्रिंटर के मार्केट में एप्सन सबसे आगे है। कंपनी का कुल मार्केट शेयर 46.07 फीसदी था। वित्तीय वर्ष 2020 के दौरान समाज में आए बदलाव की वजह से ऑफिस में भी बदलाव आए। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रिंटर का काफी इस्तेमाल हुआ। हम सभी श्रेणियों में प्रिंटर पर प्रिंटिग की लागत काफी कम ऑफर करते रहे हैं। यह पर्यावरण पर बेहतरीन और बेमिसाल प्रभाव डालता है। इससे हमारे उपभोक्ता प्रिंटिंग में आने वाली लागत और पर्यावरण के प्रभाव की चिंता किए बिना अपने दस्तावेजों को आसानी से प्रिंट कर सकते हैं। एप्सन इंडिया में इंक जेट प्रिंटर्स डिविजन में सीनियर जनरल मैनेजर शिवा कुमार ने कहा, “एप्सन लगातार मार्केट में सबसे ऊंची पायदान पर रहा है। यह उपलब्धि हमारे लिए केवल एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर ही नहीं है, बल्कि यह भारत के साथ दुनिया भर में हमारे प्रिंटर्स में लोगों के अटूट विश्वास को भी प्रमाणित करता है। हमने भारतीय उपभोक्ताओं को काफी करीब से जाना और समझा है। उपभोक्ताओं की मानसिकता को समझने से देश में हमारे इको टैंक प्रिंटर्स को ही शानदार और हैरतअंगेज सफलता मिली है। आज उपभोक्‍ता हमारी कंपनी द्वारा प्रदान किए गए किफायती और इकोफ्रेंडली प्रिंटर्स को अपना रहे हैं। एप्सन में हम अपने उपभोक्ताओं को बेहतरीन क्वॉलिटी, वैल्यू और सोल्यूशन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।“ उपभोक्ता वस्तुओं या प्रिंटर्स के इस्तेमाल से CO2 के उत्सर्जन में आई कमी की गणना करने के लिए अगस्त 2020 तक कुल बेची गई इंक की बोतलों की तुलना इंक कार्टिज की बोतलों से की गई और फिर उनसे होने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में उन्हें बदला गया। एप्सन के आकलन की स्थितियों के आधार पर कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन की मात्रा की गणना की गई। इसमें उपभोक्ता वस्तुओं और उनके पाटर्स के निर्माण में लगने वाले प्लास्टिक से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी विचार किया गया। कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन की असली मात्रा प्रत्येक उपभोक्ता के प्रिंटर के इस्तेमाल के तरीके से अलग-अलग होगी। वर्ष 2210 से अगस्त 2020 तक बेचे गए ग्लोबल हाई-कैपिसिटी इंक टैंक प्रॉडक्ट्स की संख्या के संदर्भ में। कंपनी के पास 2010 से 2019 तक बेचे गए ग्लोबल इंकटैंक प्रॉडक्ट्स की संख्या के संदर्भ में अगर देखा जाए. तो कंपनी का इन वर्षों में मार्केट के टॉप शेयर पर कब्जा रहा। एप्सन ने 50 मिलियन हाई-कैपेसिटी इंक टैंक इंकजेट प्रिंटर्स की बिक्री की प्रिंटर्स के इस्‍तेमाल से CO2 उत्‍सर्जन में 160,000 टन से ज्‍यादा की कमी आई।

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