October 22, 2020

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पुजारी हत्याकांड : पीड़ित परिवार ने अंतिम संस्कार करने से मना किया

जयपुर:- करौली जिले के सपोटरा इलाके में पेट्रोल डालकर जलाए गए पुजारी बाबूलाल वैष्णव का शव शुक्रवार देर रात उनके गांव पहुंचा। पीडि़त परिवार ने शनिवार सुबह 50 लाख के मुआवजे तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग को लेकर अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया है। शनिवार सुबह बड़ी संख्या में भाजपा नेता और कार्यकर्ता पीडि़त परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा शनिवार सुबह पीडि़त के घर पर मौजूद रहे, जहां उन्होंने पीडि़त परिवार की मांगों का समर्थन किया है। इससे पहले जयपुर में भी परिजनों ने ये मांग रखते हुए शव लेने से मना कर दिया था। वहां समझाइश के बाद वे शव को लेकर गांव आ गए लेकिन यहां आकर उन्होंने फिर वही मांग दोहराते हुए अंतिम संस्कार से मना किया है। मौके पर मौजूद अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुदर्शन सिंह तोमर, उपखण्ड अधिकारी ओमप्रकाश मीणा, पुलिस उपाधीक्षक महावीर प्रसाद मीणा तथा थानाधिकारी हरजीलाल यादव ने परिजनों सहित गांव वालों को अंत्येष्टि के लिए समझाइश के प्रयास किए लेकिन वो सहमत नहीं हुए। सरपंच इन्द्र देवी मीणा के पति घनश्याम मीणा ने कहा कि जब तक परिवार को सहायता नहीं मिलेगी तथा अन्य मांग पूरी नहीं होगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। मौके पर तहसीलदार दिनेश चंद मीणा नायब तहसीलदार विष्णु दत्त शर्मा, हल्का पटवारी बनवारी ग्राम विकास अधिकारी सुबह सिंह गुर्जर सहित सुरक्षा व शांति व्यवस्था की दृष्टि से गांव में पुलिस बल तैनात है। सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा भी बूकना गांव पहुंच गए। मीणा ने कहा कि गांव की सभी जातियों के पंच-पटेलों के साथ बातचीत के बाद यह फैसला हुआ है कि पुजारी परिवार को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए। अपराधियों को सख्त सजा होनी चाहिए। मैंने पुजारी के परिवार को एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता की है। गहलोत सरकार अपनी नींद तोड़े और पीडि़त परिवार इंसाफ दे। उल्लेखनीय है कि बाबूलाल वैष्णव सपोटरा तहसील के बूकना गांव के पुराने राधाकृष्ण मंदिर में पूजा करते थे। ग्रामीणों ने मंदिर के लिए खेती की जमीन दान दी थी, जो राजस्व रिकॉर्ड में मंदिर माफी में दर्ज है। करीब एक महीने पहले कुछ लोग जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करने लगे। पुजारी ने पंच-पटेलों से शिकायत की थी। 4-5 दिन पहले भी गांव के 100 घरों की बैठक हुई थी, जिसमे पंचों ने पुजारी का समर्थन किया। इसके बाद गांव के कुछ अतिक्रमणकारियों ने पेट्रोल डालकर वैष्णव को जिंदा जलाने की कोशिश की। उन्हें झुलसी अवस्था में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां 9 अक्टूबर को उन्होंने दम तोड़ दिया।

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