October 30, 2020

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एनएएम क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने के प्रयासों का मंच न तो रहा और न हो सकता है : भारत

नई दिल्ली:- भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि गुट-निरपेक्ष आंदोलन कभी किसी देश द्वारा दूसरे देश की क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने के प्रयासों का मंच ना तो रहा है और ना ही हो सकता है। विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने कहा कि गुट-निरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) में मौजूदा समय के प्राथमिक मुद्दों पर ध्यान देने के लिए अग्रणी भूमिका निभाने की क्षमता है। उन्होंने गुट-निरपेक्ष आंदोलन की डिजिटल मंत्री स्तरीय बैठक में अपने संबोधन में कहा, ‘दूसरी तरफ अगर हम ऐसे मुद्दे उठाते हैं, जो हमें एकजुट करने के बजाय बांटते हैं। यदि हम अपने आंदोलन को ऐसे मंच तक सीमित करते हैं, जहां द्विपक्षीय शिकायतें या साथी सदस्य राष्ट्रों को शर्मसार करने के लिए ऐसा किया जाता है। तो हम जल्द ही कमजोर और असंगत हो जाएंगे और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में हमारी कोई हिस्सेदारी नहीं रह जाएगी।’ उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को ऐसे मुद्दे उठाने से पहले सोचना चाहिए जो एजेंडा में नहीं हैं। मुरलीधरन ने कहा, ‘नैम कभी किसी देश द्वारा दूसरे देश की क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने के प्रयासों का मंच न था और ना ही हो सकता।’ उन्होंने कहा कि जब नैम के सदस्य राष्ट्र एक साथ खड़े होते हैं और एक आवाज में बोलते हैं, उदाहरण के लिए फलस्तीन के लिए नैम की अडिग प्रतिबद्धता, तो हम वैश्विक परिणामों पर निर्णायक प्रभाव डाल सकते हैं और डालते हैं।
विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि हम अच्छाई के लिए शक्ति बन सकते हैं। मुरलीधरन ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने हमें आपसी जुड़ाव और एक दूसरे पर निर्भरता का आभास कराया है। उन्होंने कहा, ‘हम इस शत्रु से अकेले नहीं लड़ सकते। हमारे देशों की जनता इस महामारी और उसके प्रभावों से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह बीमारी सीमाएं नहीं देखती, इसलिए इसके खिलाफ हमारी लड़ाई समन्वित होनी चाहिए।’
मुरलीधरन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोरोना वायरस संकट से लड़ने के लिहाज से समस्त मानव जाति की मदद के लिए भारत की अत्याधिक टीका उत्पादन और आपूर्ति क्षमता का इस्तेमाल किया जाएगा। मुरलीधरन ने कहा कि यह उन प्रयासों की अभिव्यक्ति है जो भारत को 2021-22 में सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता और 2022 में जी20 की अध्यक्षता संभालने में उसका मार्गदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि भारत पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हुए मानवता के कल्याण और शांति के लिए अपने समृद्ध विकास अनुभवों का उपयोग करेगा।

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