October 27, 2020

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किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहा रही कांग्रेस : दीपक प्रकाश

रांची:- राज्यसभा सांसद एवं झारखंड भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कृषि सुधार कानून को किसानों के हित में बताया और कहा कि इस नये कानून को लेकर कांग्रेस घड़ियाली आंसू बहा रही है।
श्री प्रकाश ने शनिवार को किसानों की एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कृषकों को तीनों कृषि सुधार कानून के फायदे गिनाते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस के बड़े नेता, जिन्होंने आज तक खेती नहीं की, जिनके परिवार के दामाद ने हरियाणा में किसानों की जमीनें लूटीं, वे आज किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।
सांसद ने कहा कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार तीन नए कानून लेकर आई है। आजादी के समय किसान जितना फसल उत्पादन करता था, उसकी तुलना में आज 100 गुना ज्यादा फसल का उत्पादन कर रहा है। किसानों ने मेहनत के बल पर उत्पादन तो बढ़ाया लेकिन उसके अनुपात में किसानों की आय नहीं बढ़ी। किसानों के इस दर्द को भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समझा।
श्री प्रकाश ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए मोदी सरकार ने पहले किसानों की आय में बाधा बन रहे दिक्कतों को खोजा। इसके बाद पिछले महीने तीन विधेयक लाए गए। अब ये विधेयक कानून बन गए हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि नए कानून से किसानों के पास खुला बाजार होगा तो किसान अपनी फसल को कहीं भी अधिकार से बेच सकते हैं। इससे पहले किसान को अपनी फसल मंडियों में बेचनी पड़ती थी, जहां बिचौलियों और दलालों की सरकार चलती थी। दलालों और बिचौलियों की सरकार को हटाने का काम मोदी सरकार ने किया है।
श्री प्रकाश ने कहा कि लंबे समय तक देश में कांग्रेस की सरकार रही। जब देश में अटलजी की सरकार बनी और राजनाथ सिंह कृषि मंत्री बने तो स्वामीनाथन आयोग का गठन किया गया। किसानों के हित और उनके आय को कैसे बढ़ाया जाए, इस संबंध में आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था। थोड़े दिनों बाद अटलजी की सरकार चली गई और फिर कांग्रेस की सरकार आई। लेकिन स्वामी नाथन आयोग के रिपोर्ट को लागू नहीं किया गया। क्योंकि कांग्रेस की नीति और नीयत किसानों के प्रति ठीक नहीं थी।
भाजपा सांसद ने कहा कि किसानों के लिए समर्थन मूल्य पहले भी था, आज भी है और आगे भी जारी रहेगा। यदि झारखंड की बात की जाए तो पूर्व की रघुवर सरकार में यूरिया की कीमत 268 रुपए थी। आज हेमंत सोरेन की सरकार है। यूरिया की कीमत भी 268 रुपए ही है लेकिन किसानों को ये 550 से लेकर 700 रुपए तक में मिल रहा है। कांग्रेस और उनकी समर्थित सरकार के मंत्री केवल घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।

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