November 1, 2020

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लालू प्रसाद को चाईबासा कोषागार से जुड़े अवैध निकासी मामले में मिली जमानत

अभी जेल से नहीं आ पाएंगे बाहर

रांची:- अरबों रुपये के बहुचर्चित चारा घोटाले मामले में सजायाफ्ता राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर शुक्रवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की अदालत में चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में लालू प्रसाद की ओर से जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव को जमानत दे दी गयी है, लेकिन अभी वे जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।
लालू प्रसाद यादव के अधिवक्ता प्रभात कुमार ने बताया कि चाईबासा कोषागार घोटाले मामले में न्यायमर्ति अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने जमानत दे दी है। सजा की आधी अवधि को देखते हुए उन्हें जमानत मिली है। उन्होंने बताया कि अदालत ने दो लाख रुपये निचली अदालत में जमा कराने का निर्देश दिया है और रिम्स को लालू प्रसाद की मेडिकल रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। 6 नवंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा 50 हजार रुपये का जुर्माना भी भरने का निदेश दिया गया है। लालू प्रसाद के अधिवक्ता ने बताया कि दुमका कोषागार से जुड़े मामले में आगामी 9 नवंबर को उनकी आधी सजा पूरी होगी, जिसके बाद उस मामले में भी जमानत मिल जाने की उम्मीद है।
लालू प्रसाद के अधिवक्ता ने बताया कि सीबीआई की ओर से इसका विरोध किया गया, लेकिन उनकी ओर से तर्क दिया गया कि इस मामले में सजा की आधी पूरी होने के कारण पूर्व में ही अन्य अभियुक्तों को भी जमानत दे दी गयी है, जिसके बाद अदालत ने जमानत दे दी।
इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा इस मामले में लालू प्रसाद को पांच वर्ष की सजा सुनायी गयी थी। इस मामले में आधी सजा पूरा करने और विभिन्न बीमारियों का हवाला देते हुए लालू प्रसाद की ओर से जमानत याचिका दायर की गयी थी।
लालू प्रसाद चारा घोटाले के तीन मामलों में सजायाफ्ता है। उन्हें देवघर कोषागार मामले में जुलाई 2019 में ही जमानत मिल चुकी है और आज चाईबासा कोषागार से जुड़े मामले में फैसला आया। इस मामले में लालू प्रसाद को जमानत मिलने पर भी अभी वे जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि चारा घोटाले के तीसरे मामले दुमका कोषागार में उन्हें दो अलग-अलग धाराओं में सात-सात साल की सजा सुनायी गयी है।

कब-कब किस-किस मामले में कितनी सुनाई गई है सजा

23 दिसम्बर 2017 को देवघर कोषागार से 84.53 लाख रुपए की अवैध निकासी के मामले में उन्हें साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई थी।
24 मार्च 2018 को दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के मामले में 2 अलग-अलग धाराओं में लालू को 7-7 साल की सजा सुनाई गई, जबकि 60 लाख जुर्माना भी लगाया।
3 अप्रैल 2018 में चाईबासा कोषागार से अवैध तरीके से 37.7 करोड़ और 33.67 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के मामले में पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई है। लालू की यह तीनों सजा एक साथ चल रही है।

23 दिसंबर 2017 से जेल में हैं लालू प्रसाद

लालू प्रसाद यादव को रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने देवघर कोषागार से अवैध निकासी मामले में 23 दिसंबर 2017 को दोषी करार दिया था, तब से वह जेल में है। हालांकि इस बीच 17 मार्च 2018 को तबीयत बिगड़ने पर पहले उन्हें रिम्स और फिर दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया। कोर्ट ने उन्हें 11 मई को इलाज के लिए छह हफ्ते की जमानत मंजूर की थी। इसे बढ़ाकर 14 और फिर 27 अगस्त तक किया। कोर्ट ने इसके बाद 20 अगस्त 2018 को लालू यादव को कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से लालू रिम्स में भर्ती हैं, पहले वे रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती थे, लेकिन संक्रमण के खतरे के मद्देनजर उन्हें रिम्स निदेशक के खाली पड़े केली बंगले में भर्ती कराया गया है।

सीबीआई की ओर से तीसरे मामले में विरोध की बनायी गयी रणनीति

दुमका, कोषागार से 3.13करोड़ अवैध निकासी मामले में 24 मार्च 2018 को लालू प्रसाद यादव को दो अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा सुनयी गयी है, जबकि 60लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सीबीआई की ओर से अदालत में यह तर्क देने की रणनीति बनायी गयी है कि अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा सुनायी गयी है, ये सजा एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग चलेगी, इसलिए सजा की अवधि कुल 14वर्ष हो जाती है। इस कारण अभी सजा की आधी अवधि पूरा नहीं हो रही है। दूसरी तरफ सीबीआई के अधिवक्ता का कहना है कि सभी धाराओं की सजा एक साथ चलती है।

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