October 30, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

बिहार में बजेपी के कई दावेदार एलजेपी के टिकट पर फिर मैदान में उतरने की तैयारी में

एनडीए में सीट बंटवारे का दिखने लगा साइड इफेक्ट, बेटिकट लोगों का ठिकाना बनी एलजेपी

पटना:- बिहार में बीजेपी के कई ऐसे दावेदार हैं, जिन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी की तरफ से टिकट मिला था, लेकिन इस बार जेडीयू के चलते बेटिकट हो गए हैं और वो एलजेपी के टिकट पर फिर मैदान में उतरने की तैयारी में है। ऐसे लोग एलजेपी का दामन थामकर जेडीयू के खिलाफ चुनावी ताल ठोकने की कवायद में जुट गए हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक पटना में जिस समय बीजेपी और जेडीयू नेता सीट शेयरिंग को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान कर रहे थे, उसी दौरान बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह एलजेपी की सदस्यता ग्रहण कर रहे थे। राजेंद्र सिंह ने इसलिए पार्टी छोड़ दी है, क्योंकि उनकी दिनारा सीट जेडीयू के कोटे में चली गई है। 2015 में यहां से वो चुनाव लड़ चुके हैं और बीजेपी के साथ-साथ संघ के प्रचारक भी रहे हैं। एलजेपी अब उन्हें दिनारा सीट से ही जेडीयू के खिलाफ प्रत्याशी बनाने का दांव चल सकती है।
खबर है कि बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक रामेश्वर चौरसिया ने भी एलजेपी से सिंबल ले लिया है। हालांकि, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने फोन करके रामेश्वर चौरसिया को एलजेपी में जाने से रोका और दिल्ली बुला लिया है। चौरस‍िया बीजेपी के ट‍िकट पर नोखा व‍िधानसभा सीट से लगातार तीन बार 2000 से लेकर 2015 तक व‍िधायक रह चुके हैं। इस बार चौरसिया की नोखा सीट जेडीयू के खाते में चली गई है। ऐसे ही बीजेपी की वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक डॉ. उषा विद्यार्थी ने भी एलजेपी का दामन थाम लिया है। एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने डॉ उषा को पार्टी की सदस्यता दिलाई। वो पटना के पालीगंज सीट से बीजेपी की विधायक रह चुकी हैं। एनडीए में सीट शेयरिंग में पालीगंज सीट जेडीयू के खाते में गई है, जिसके चलते उन्होंने बीजेपी के 28 साल का साथ छोड़कर एलजेपी का दामन थाम लिया हैं और अब जेडीयू के खिलाफ चुनावी मैदान में उतर सकती है। उषा विद्यार्थी को पालीगंज से एलजेपी ने चुनाव लड़ाने की हरी झंडी भी दे दी है।

Recent Posts

%d bloggers like this: