October 28, 2020

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भाजपा के बागियों का नया ठिकाना बनी लोजपा की झोपड़ी

पटना:- बिहार में हो रहे विधान सभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों के बीच सीटों के बंटवारे के बाद उम्मीदवारी की दावेदारी समाप्त होने से निराश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बागियों का नया ठिकाना लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) बन गयी है।
बिहार भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और कद्दावर नेता राजेंद्र सिंह के बाद एक और उपाध्यक्ष रहीं डॉ. उषा विद्यार्थी ने भी बुधवार को लोजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। डॉ. विद्यार्थी अब पटना जिले के पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से लोजपा की प्रत्याशी होंगी। इसी तरह रोहतास जिले का नोखा विधानसभा क्षेत्र भी जदयू के हिस्से में चला गया है। ऐसे में वहां के चार बार विधायक और उत्तर प्रदेश भाजपा के सह प्रभारी रहे रामेश्वर चौरसिया भी अब बागी हो गए हैं। उन्हें भी लोजपा अपनी झोपड़ी में शरण देना चाहती है, हालांकि अभी श्री चौरसिया ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है।
श्री चौरसिया ने ‘यूनीवार्ता’ से बातचीत में कहा कि वर्ष 2000 से लेकर 2010 के विधानसभा चुनाव तक वह लगातार नोखा से जीतते रहे। वर्ष 2015 के चुनाव में वह सिर्फ इसलिए हार गए कि परिसीमन के कारण उनके क्षेत्र का कुछ हिस्सा सासाराम में चला गया था लेकिन उसके बावजूद वह अपने क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे। सासाराम और नोखा विधानसभा क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता अभी के किसी भी अन्य नेता से अधिक है।
भाजपा के पूर्व विधायक ने कहा कि वह दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के टॉपर छात्र रहे हैं और सिविल सेवा में जाने के बजाय उन्होंने श्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं श्री लालकृष्ण आडवाणी से प्रभावित होकर राजनीति को चुना लेकिन आज राजनीति बहुत गंदी हो गई है। उन्होंने कहा कि उनके जैसे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के साथ जैसा व्यवहार हुआ है उससे तो इच्छा हो रही है कि वह भाजपा क्या राजनीति ही छोड़ दें।
गौरतलब है कि लोजपा ने दिनारा विधानसभा क्षेत्र से जदयू के मौजूदा विधायक और मंत्री जय कुमार सिंह के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबंध रखने वाले श्री राजेंद्र सिंह को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। श्री सिंह वर्ष 1983 में ही आरएसएस से जुड़े थे। वर्ष 2004 में वह भाजपा से जुड़े और उन्होंने वाराणसी में संगठन मंत्री का दायित्व संभाला। इसके बाद वर्ष 2013 में झारखंड के प्रदेश संगठन महामंत्री बने। श्री सिंह जब पिछला विधानसभा चुनाव दिनारा से लड़ रहे थे तब मीडिया ने उन्हें भावी मुख्यमंत्री के रूप में खूब प्रचारित किया था।
वहीं, डॉ. उषा विद्यार्थी पालीगंज से 2010 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचीं थीं। बिहार राज्य महिला आयोग की सदस्य और पार्टी की प्रवक्ता रहीं डॉ. विद्यार्थी को पिछले चुनाव में भी भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं बनाया था लेकिन उस समय वह पार्टी से बगावत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थीं।
वर्ष 2015 के चुनाव में डॉ. विद्यार्थी के स्थान पर भाजपा ने रामजन्म शर्मा को प्रत्याशी बनाया था लेकिन वह राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के जयवर्धन यादव से चुनाव हार गए। इस बार भाजपा के साथ सीटों के तालमेल के तहत पालीगंज सीट जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के खाते में चली गई है और राजद छोड़कर आए निवर्तमान विधायक जयवर्धन यादव को जदयू ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

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