October 20, 2020

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सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हाथरस कांड की सीबीआई जांच चाहती है योगी सरकार

नई दिल्ली :- उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती से कथित गैंगरेप और मौत मामले में योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच चाहती है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कहा कि वह कोर्ट की निगरानी में हाथरस कांड की जांच चाहती है। योगी सरकार ने उस याचिका पर सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल कर पक्ष रखा है, जिसमें हाथरस कांड की रिटायर्ट जज की निगरानी में सीबीआई या एसआईटी से जांच कराने की मांग की गई है। हाथरस कांड मामले में दायर इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की बेंच सुनवाई करेगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि इस घटना की सच्चाई सामने लाने के लिए सरकार निष्पक्ष जांच के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अपनी निगरानी में हाथरस में कथित गैंगरेप और मौत मामेल की सीबीआई जांच के निर्देश देने चाहिए। सरकार ने आगे बताया कि कानून-व्यवस्था कायम रखने और हिंसा से बचने के लिए रात में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार किया गया। यूपी सरकार के इस हलफनामे में राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों को जाति विभाजन के प्रयास के लिए दोषी ठहराया गया है। इसके अलावा, यूपी सरकार ने अपने हलफनामे के प्वाइंट 10 में बताया है कि और किन वजहों से रात में ही पीड़िता का अंतिम संस्कार किया। हलफनामे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने रात के ढाई बजे पीड़िता के शव को जलाने के संदर्भ में बाबरी मस्जिद केस की वजह से जिलों को हाई अलर्ट पर रखने और कोरोना की वजह से भीड़ न इकट्ठा होने देने का भी जिक्र किया है। इसमें कहा गया है कि अयोध्या-बाबरी केस में फैसले की संवेदनशीलता और कोरोना के मद्देनजर परिवार की मंजूरी से पीड़िता का रात में अंतिम संस्कार किया गया। बता दें कि दिल्ली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सत्यम दुबे और कुछ वकीलों ने यह याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि यूपी में मामले की जांच और ट्रायल निष्पक्ष नहीं हो पाएगी। गौरतलब है कि हाथरस कांड को लेकर यूपी सरकार और पुलिस के एक्शन पर सवाल उठने लगे थे, जिसके बाद यूपी सरकार ने सोमवार को यह मामला सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया था। याचिका में उत्तर प्रदेश पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। पुलिस के विपक्षी नेताओं के साथ टकराव और रात 2.30 बजे पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार किए जाने का जिक्र याचिका में किया गया है। याचिका में हाथरस केस के ट्रायल को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यूपी में मामले की जांच और सुनवाई निष्पक्ष नहीं हो पाएगी। इसलिए इसे दिल्ली ट्रांसफर किया जाए। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्‍यवस्‍था) प्रशांत कुमार के मुताबिक, हाथरस प्रकरण में हाथरस जिले के विभिन्‍न थाना क्षेत्रों में छह मुकदमों के अलावा सोशल मीडिया के विभिन्‍न प्‍लेटफार्म पर आपत्तिजनक टिप्‍पणी को लेकर बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज, हाथरस, अयोध्‍या, लखनऊ आयुक्तालय में कुल 13 मामले दर्ज किये गये हैं। दिल्‍ली से हाथरस की तरफ जा रहे चार संदिग्‍धों के विरूद्ध निरोधात्‍मक कार्रवाई करते हुए उन्‍हें गिरफ़्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि ये लोग हाथरस के बहाने उत्‍तर प्रदेश को ‘जलाने की साजिश में शामिल हैं। इस बीच मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने सख्‍त तेवर दिखाते हुए कहा, ‘न केवल देश और प्रदेश में जातीय और सांप्रदायिक दंगे फैलाने की साजिश रची जा रही है बल्कि इसकी नींव रखने के लिए विदेश से फंडिंग भी हो रही है। गौरतलब है कि हाथरस जिले के एक गांव में 14 सितंबर को 19 वर्षीय दलित लड़की से चार लड़कों ने कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया था। इस लड़की की बाद में 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। मौत के बाद आनन-फानन में पुलिस ने रात में अंतिम संस्कार कर दिया था, जिसके बाद काफी बवाल हुआ। परिवार का कहना है कि उसकी मर्जी से पुलिस ने पीड़िता का अंतिम संस्कार किया, वहीं पुलिस ने इन दावों को खारिज किया।

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