October 20, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

चिराग की ‘कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना

पटना:- बिहार विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान का ‘मोदी से बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं’ के साथ जोर आजमाने का मकसद ‘कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना’ है। राजनीति में दिलचस्पी लेने वाला हर शख्स लोजपा अध्यक्ष श्री पासवान की विधानसभा के चुनाव में खेली गई इस नई ‘चाल’ को समझने की कोशिश कर रहा है। आम लोग अपने-अपने हिसाब से इसकी व्याख्या भी कर रहे हैं लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो यह चाल लोजपा संस्थापक रामविलास पासवान और उनके पुत्र चिराग पासवान की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, रामविलास पासवान अक्सर कहते रहे हैं कि नेता वही है जो 10 साल आगे की सोचता है। पासवान ने यह बात निश्चित रूप से अपनी पुत्र को भी सिखाई होगी इसलिए श्री चिराग पासवान भविष्य की तैयारी में अभी से जुट गए हैं। इस चुनाव में वह खुद उम्मीदवार बनकर मैदान में उतर आए तो इसमें भी कोई आश्चर्य नहीं होगा। मुख्यमंत्री एवं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर परोक्ष रूप से तंज कसते हुए एक बार उन्होंने कहा था कि वह लड़कर और जीत कर दिखाना चाहते हैं कि वह जनता के बीच से चुनकर आए हैं। वैसे देखा जाए तो इस चुनाव में उनका मुकाबला जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से नहीं बल्कि राष्ट्रीय जनता दल और प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव से है। चुनाव में दो युवा चेहरे तेजस्वी और चिराग बिहार के सबसे चर्चित चेहरा श्री नीतीश कुमार से मुकाबला करेंगे तो राज्य की जनता को दोनों युवाओं के बीच तुलना करने का मौका मिलेगा। श्री चिराग पासवान को लगता है कि यदि इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी जैसे दिग्गज नेताओं की छत्रछाया में लोजपा चुनाव लड़ती है तो उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान नहीं बन पाएगी जबकि इस चुनाव में उनके प्रतिस्पर्धी श्री तेजस्वी यादव ने कांग्रेस जैसी दिग्गज पार्टी और वाम दलों का नेतृत्व करते हुए श्री नीतीश कुमार को चुनौती देकर अपना कद बड़ा कर लिया है। इस प्रतिस्पर्धा में श्री चिराग पासवान पीछे नहीं रहना चाहते थे इसलिए वह श्री नीतीश कुमार को चुनौती देने के लिए ताल ठोक रहे हैं। लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान को इस लड़ाई में जोखिम का भी पता है। वर्ष 2000 में पार्टी का गठन हुआ और उसके बाद फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में 178 सीट पर लोजपा लड़ी थी और उसे 29 सीट पर जीत मिली थी। यह उसका अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन है। उस समय श्री रामविलास पासवान सत्ता की चाबी लेकर घूमते रह गए और जदयू ने उनकी पार्टी के 18 विधायकों को तोड़ दिया। इससे पहले कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार बनाने का दावा करता राज्यपाल ने त्रिशंकु विधानसभा को भंग कर दिया। इसके बाद नवंबर 2005 में पार्टी 203 सीट पर लड़ी लेकिन 10 सीट पर ही उसे जीत मिली। वर्ष 2010 में लोजपा ने राजद के साथ मिलकर 75 सीट पर चुनाव लड़ा लेकिन उसके तीन उम्मीदवार ही जीत पाए। वर्ष 2015 में वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ 42 सीट पर लड़ी लेकिन मात्र दो सीट ही बचा पाई। चिराग पासवान एक बार फिर अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने के फरवरी 2005 के प्रयोग को दुहराना चाहते हैं इसलिए वह वोट के जुगाड़ के लिए मतदाताओं को झोपड़ी (लोजपा का चुनाव चिन्ह) में कमल (भाजपा का चुनाव चिन्ह) दिखा रहे हैं। हालांकि वह यह मानते हैं कि लोजपा की राह आसान नहीं है। उन्हें अभी लंबा सफर तय करना है, अभी और अनुभव लेना है। लोजपा अध्यक्ष ने इस बार के विधानसभा चुनाव में जदयू के खिलाफ अपनी पार्टी के प्रत्याशी उतारने के फैसले को लेकर बिहारवासियों के नाम खुला पत्र सोमवार को ट्विटर पर साझा किया और कहा कि बिहार के विकास के लिए उनके इस पवित्र फैसले के बारे में जदयू के लोग भ्रम फैलाएंगे लेकिन उन्होंने अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए यह निर्णय नहीं लिया है। यह फैसला बिहार पर राज करने के लिए नहीं नाज करने के लिए लिया है। जदयू प्रत्याशियों को दिया गया एक भी वोट उनके बच्चों को पलायन करने पर मजबूर कर देगा। पासवान यह भी कहते हैं कि बिहार में चुनाव के बाद भाजपा के नेतृत्व में लोजपा के साथ ही सरकार बनेगी और लोजपा के सभी विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करेंगे। दरअसल इसके पीछे भी उनकी सोच यही है। भाजपा के मतदाता जो जदयू से नाराज हैं वह उसे वोट कर देंगे। वहीं, लोजपा के इस बदले रुख पर भाजपा की चुप्पी जदयू को बेहद खल रही है। जदयू के विधान परिषद में उपनेता रहे असलम आजाद नेे तो खुलकर कह दिया है कि दो नाव की सवारी भाजपा को महंगी पड़ सकती है। भाजपा ने यदि समय रहते लोजपा से दूरी नहीं बनाई और कड़ा रुख नहीं दिखाया तो जदयू के वोटर भाजपा से दूर हो जाएंगे।

Recent Posts

%d bloggers like this: